वाड्रा-डीएलएफ जमीन सौदा: हरियाणा सरकार ने खेमका को आरोपपत्र थमाया

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Thursday, December 05, 2013-5:20 PM

चंडीगढ़: भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अशोक खेमका पर शिकंजा कसते हुए हरियाणा सरकार ने गुडगांव में रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ और रॉबर्ट वाड्रा के बीच हुए जमीन सौदे के परिवर्तन को पिछले वर्ष अक्तूबर महीने में रद्द करने के मामले में उन्हें आरोप पत्र दे दिया है।

आधिकारिक सूत्रों ने आज बताया कि यह आरोप पत्र कल खेमका की गैरमौजूदगी में उनके घर पहुंचाया गया। खेमका को आरोप पत्र का जवाब देने के लिए 15 दिनों का समय दिया गया है। वर्तमान में हरियाणा बीज विकास निगम (एचएसडीसी) के प्रबंध निदेशक पद पर तैनात खेमका से जब इस बाबत संपर्क किया गया तो उन्होंने फोन पर पीटीआई से कहा कि वह कल दिल्ली गए हुए थे और जल्द ही इन आरोपों पर अपना जवाब देंगे।


सूत्रों ने बताया कि सात पन्नों के इस आरोप पत्र में कथित प्रशासनिक कदाचार और इस कारण वड्रा एवं डीएलएफ की प्रतिष्ठा को पहुंची नुकसान के मुद्दे को मुख्य रूप से शामिल किया गया है। उन्होंने बताया कि इसमें जमीन का दाखिला खारिज (म्यूटेशन) प्रक्रिया रद्द करने के बाद खेमका का मीडिया में जाना, राज्य सरकार की नीतियों की निंदा करना और तबादला किए जाने के बावजूद तत्काल अपना पद नहीं छोडऩे से जुड़े मुद्दों को भी शामिल किया गया है।
 
वर्ष 1991 बैच के आइएएस अधिकारी ने 15 अक्तूबर, 2012 को जमीन का म्यूटेशन रद्द कर दिया, जिसे राज्य सरकार ने प्रशासनिक रूप से अनुचित कदम करार देते हुए उनका तबादला एचएसडीसी के प्रबंध निदेशक पद पर कर दिया था। हरियाणा सरकार 15 अक्तूबर, 2012 से लेकर इस वर्ष चार अप्रैल तक एचएसडीसी के प्रबंध निदेशक के तौर पर उनके कार्यकाल के दौरान गेंहू के बीजों कथित रूप से कम बिक्री के मामले में भी उनके खिलाफ दूसरा आरोप पत्र तैयार कर रही है।
 
वड्रा डीएलएफ मामले में जारी आरोपपत्र पर जब हरियाणा सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी से टिप्पणी मांगी गई तो उन्होंने कहा कि यह प्रशासनिक मामला है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपने किसी भी अधिकारी के खिलाफ बदले की भावना से कार्रवाई या उन्हें निशाना बनाने में यकीन नहीं करती है।
 
गौरतलब है कि खेमका को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर गुडग़ांव के शिकोहपुर गांव में साढ़े तीन एकड़ जमीन का म्यूटेशन रद्द करने का आदेश जारी करने में कथित तौर पर प्रशासनिक रूप से अनुचित कदम उठाने का जिम्मेदार ठहराया गया था। वड्रा ने यह जमीन डीएलएफ के हाथों बेची थी।


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