महिलाओं और युवाओं के उत्साह से बढ़ा मत प्रतिशत

  • महिलाओं और युवाओं के उत्साह से बढ़ा मत प्रतिशत
You Are HereNcr
Friday, December 06, 2013-1:17 PM

नई दिल्ली (धनंजय कुमार): विधानसभा चुनाव में रिकार्ड वोटिंग कराने में चुनाव आयोग की भूमिका के साथ पहली बार मतदान कर रहे मतदाताओं तथा महिलाओं का महत्वपूर्ण योगदान है। यह बात दीगर है कि इन सबके बावजूद देश की राजधानी उन सभी 4 (राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश तथा मिजोरम) राज्यों से पीछे रह गई, जहां इस बार मतदान हुए हैं।

यदि पहली बार के मतदाता तथा महिला मतदाताओं ने जोश नहीं दिखाया तो दिल्ली अपने रिकार्ड को भी नहीं तोड़ पाती। दिल्ली में इस बार 65.13 प्रतिशत मतदान हुआ, जो दिल्ली विधानसभा के  इतिहास में सबसे ज्यादा मत प्रतिशत है जिसमें कुल 65.48 प्रतिशत पुरुषों और 64.68 प्रतिशत महिलाओं ने मतदान किया।

पहली बार मतदान करने वालों की संख्या 4.05 लाख थी। इस बार कुल 1.19 करोड़ योग्य मतदाताओं में से 77.7 लाख से ज्यादा लोगों ने कल मतदान किया। सबसे ज्यादा मतदान सीमापुरी सीट 72.19 प्रतिशत: पर दर्ज किया गया जबकि सबसे कम मतदान बल्लीमारान 56.20 प्रतिशत: में दर्ज किया गया।

वर्ष 2008 के विधानसभा चुनावों में मतदान का कुल प्रतिशत 57.58 रहा था जबकि वर्ष 1993 में यह 61.75 प्रतिशत था। पिछली बार की तुलना में इस बार मत प्रतिशत में 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी से सभी राजनीतिक पार्टियों की धड़कनें बढ़ गई है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो जब भी मतदान प्रतिशत बढ़ता है तो वर्तमान सत्तारूढ़ पार्टी पर खतरा मंडराने लगता है और इस दिल्ली में भी इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। 

कोई भी राजनीतिक विशेषज्ञ यह कहने की स्थिति में नहीं है कि किस पार्टी को कितनी सीटें मिल सकती है क्योंकि सत्तारूढ़ कांग्रेस तथा भाजपा ने अपने वर्तमान विधायकों को टिकट तो दिया ही था, इसके अलावा अधिकांश विधानसभा सीटों पर उन नेताओं को प्रत्याशी बना दिया, जिन्हें पिछले विधानसभा चुनाव में भी टिकट दिया गया था लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। जनआंदोलन से निकली आम आदमी पार्टी की स्थिति भी अच्छी बताई जा रही है। ऐसे में राजनीतिक विशेषज्ञ कुछ टिप्पणी करने के बजाय 8 दिसम्बर को आने वाले चुनाव परिणाम का इंतजार कर रहे हैं।


विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You