छत्तीसगढ़ से भाजपा के मुख्यमंत्री रमन सिंह जीते

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Sunday, December 08, 2013-5:29 PM

रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा की 90 सीटों के लिए हुए चुनाव में शुरूआत में कांटे की टक्कर का संकेत मिलने के बाद लगता है कि भाजपा तीसरी बार भी राज्य में सरकार बनाने में सफल होगी। छत्तीसगढ़ में एक बार फिर भाजपा की सरकार बनने का संकेत देते हुए मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने राजनांदगांव विधानसभा सीट पर अपनी निकटतम प्रतिद्वन्द्वी कांग्रेस की अलका मुदलियार को 35,866 मतों के अंतर से पराजित कर दिया। जिन सीटों पर मतगणना पूरी हो चुकी है उनके परिणाम चुनाव आयोग ने घोषित कर दिए हैं।

राज्य में ‘चाउर वाले बाबा’ के नाम से लोकप्रिय रमन सिंह को 86797 मत और अलका को 50931 मत मिले। रमन सिंह राजनांदगांव विधानसभा सीट से खड़े थे और इस सीट पर ‘नोटा’ यानी ‘‘उपरोक्त में से कोई नहीं’’ का विकल्प 2042 मतदाताओं ने चुना। अलका मई माह में दरभा घाटी में हुए नक्सली हमले में मारे गए कांग्रेस नेता उदय मुदलियार की पत्नी हैं।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह चुपचाप अपना काम बढिय़ा ढंग से करते रहे। उनका नाम राज्य के बाहर के लोगों ने तब सुना जब राष्ट्रीय मीडिया ने उन्हें नरेंद्र मोदी का विकल्प बताना शुरू कर दिया। यह डॉ. रमन ही थे जो गऱीबों के लिए एक रुपया किलो अनाज और मुफ़्त नमक की स्कीम लेकर आए और इसे बखूबी चलाया भी। एक्जिट पोल के नतीजों के बाद रमन सिंह ने कहा था कि सरकार पूर्ण बहुमत में सरकार बनाएगी और इस बार के नतीजे भाजपा के पक्ष में चौंकाने वाले होंगे।

गौरतलब है कि आयुर्वेदिक डॉक्टर रमन सिंह ने भारतीय जनसंघ से अपनी राजनीति की शुरुआत की। वे पहली बार मध्यप्रदेश विधान सभा के लिए 1990 में चुने गए थे। 1998 में उन्होंने दोबारा विधानसभा चुनाव जीता। 1999 में राजनांदगांव सीट से लोकसभा के लिए चुने जाने के बाद उन्होंने केंद्रीय राजनीति की ओर रुख कर लिया। वे अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री भी रहे।

2003 में छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। पार्टी ने उन्हीं के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। खाद्य सुरक्षा योजनाओं के चलते 2008 के चुनावों में भी रमन सिंह ने कामयाबी हासिल की। 2013 में भी पार्टी ने इन्हीं के नेतृत्व मे चुनाव लड़ा, जिसमें इन्होंने जीत हासिल की।

छत्तीसगढ़ की बैकुंठपुर विधानसभा सीट पर भाजपा के भैयालाल राजवाड़े ने अपने निकटतम प्रतिद्वन्द्वी कांग्रेस के वेदान्ती तिवारी को 1069 वोट से हराया। अभनपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस के धनेंद्र साहू ने मौजूदा कृषिमंत्री चंद्रशेखर साहू को 8,354 मतों से पराजित किया। कुरूद विधानसभा सीट पर भाजपा के अजय चंद्राकर ने अपने निकटतम प्रतिद्वन्द्वी कांग्रेस के लेखराम साहू को 27,177 वोट से हराया। सिहावा विधानसभा सीट पर भाजपा के श्रवण मरकाम ने अपनी निकटतम प्रतिद्वन्द्वी कांग्रेस की अंबिका मरकाम को 7487 वोट से हराया। बस्तर विधानसभा सीट पर कांग्रेस के लखेश्वर बघेल ने अपने निकटतम प्रतिद्वन्द्वी भाजपा के सुभाउ कश्यप को 19,168 मतों से हराया।

जगदलपुर विधानसभा सीट पर भाजपा के संतोष बाफना ने अपने निकटतम प्रतिद्वन्द्वी कांग्रेस के सामू कश्यप को 16,658 मतों से हराया।  दंतेवाड़ा विधानसभा सीट पर कंाग्रेस की देवती कर्मा ने अपने निकटतम प्रतिद्वन्द्वी भाजपा के भीमा मंडावी को 5,927 मतों से हराया। देवती दरभा घाटी में हुए नक्सली हमले में मारे गए कांग्रेस नेता और नक्सलियों के खिलाफ चले सलवा जुडूम आंदोलन के संस्थापक महेंद्र कर्मा की पत्नी हैं।  कोंटा विधानसभा सीट पर कांग्रेस के कवासी लखमा ने अपने निकटतम प्रतिद्वन्द्वी भाजपा के धनीराम बारसे को 5,786 मतों से हराया। नक्सली हमले में कवासी लखमा बाल बाल बचे थे। मई माह में हुए इस भीषण हमले में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, कर्मा के अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल भी मारे गए थे। कांग्रेस के लिए विधानसभा चुनाव में दरभा घाटी हमला बड़ा मुद्दा था।


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