बिहार में फिर होगा राजद-कांग्रेस में गठबंधन!

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Thursday, December 12, 2013-2:44 PM

पटना: चार राज्यों के चुनाव परिणाम के प्रभाव से बिहार की राजनीति भी अछूता नहीं रह सकती है। इस परिणाम के बाद बिहार में नए सिरे से गठबंधन होने के आसार हैं। ऐसे में बिहार में कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) का गठबंधन फिर से हो तो कोई आश्चर्य नहीं।

चार राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को राजनीति के जानकार लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल मान रहे थे। इस चुनाव में दिल्ली और राजस्थान के परिणाम से यह तय है कि मतदाता कांग्रेस से काफी नाराज हैं और महंगाई और भ्रष्टाचार को लेकर लोगों में असंतोष है।

दिल्ली में हालांकि आम आदमी पार्टी (आप) की कामयाबी ने राजनीति में तीसरा विकल्प भी दिया है। वैसे यह कोई पहला मौका नहीं है जब देश की दो प्रमुख राजनीतिक पार्टियों को दरकिनार कर मतदाताओं ने तीसरे विकल्प की तलाश की है।  राजनीति के जानकार कहते हैं कि इन चुनावों का बिहार में चुनावी गठबंधन पर असर पडऩा तय है। खासकर कांगे्रस फिर से गैर भाजपा दलों से तालमेल की पहल कर सकती है।

गौरतलब है कि राजद और लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के बीच गठबंधन है। पिछले चुनाव में बिहार में कांगे्रस ने अकेले दम पर लोकसभा चुनाव लड़ा था और उसे दो सीटें ही मिल सकी थी। ऐसे में पिछले लोकसभा चुनाव और वर्तमान राज्यों के परिणाम को देखते हुए माना जा रहा है कि कांग्रेस अकेले चुनाव मैदान में नहीं आएगी।

राजनीति के जानकार सुरेन्द्र किशोर ने कहा, ‘‘चार राज्यों के चुनाव परिणाम से यह तय हो गया है कि मतदाता अब केवल विकास ही नहीं, बल्कि समावेशी और संतुलित विकास चाहते हैं। राजद पूर्व से ही धर्मनिरपेक्ष पार्टियों को एक गठबंधन के तहत चुनाव लडऩे की बात कहती आ रही है। कांग्रेस भी अब चुनाव मैदान में बिना किसी साथी के जाने का जोखिम नहीं उठाना चाहेगी।’’

बिहार के सतारूढ़ जनता दल (युनाइटेड) की कांग्रेस के साथ नजदीकियां किसी से छिपी नहीं है। ऐसे में तीन दिन पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा कांग्रेस के विषय में दिया गया बयान भी यह साबित करता है कि मुख्यमंत्री एक बार फिर कांग्रेस से दूरी बनाने को तैयार हैं। मुख्यमंत्री ने चार राज्यों के चुनाव परिणाम को कांगे्रस और भाजपा के खिलाफ  अभिमत बताया था।

किशोर का मानना है कि जद (यू) अकेले चुनाव मैदान में जा सकती है। इसके पीछे उनका तर्क है कि जब जद (यू) भाजपा से अलग हुई थी तभी नीतीश ने कहा था कि इसके लिए वे कोई भी कीमत चुकाने को तैयार हैं।

इधर, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मुख्य प्रवक्ता प्रेमचंद्र मिश्रा किसी भी गठबंधन से भले इनकार करते हैं परंतु वह यह भी कहने से नहीं चूकते हैं कि पार्टी का नेतृत्व यह तय करेगा। अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।  इधर, राजद के सांसद रामकृपाल यादव ने कहा, ‘‘बिहार में सभी धर्मनिरपेक्ष दलों को एक साथ आना चाहिए।’’ कांग्रेस के साथ गठबंधन के सवाल पर उन्होंने सीधे तो कुछ नहीं कहा, लेकिन इतना जरूर कहा कि केंद्र सरकार को उनके दल का समर्थन जारी है।
 


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