सुप्रीम कोर्ट ने सांसदों-विधायकों की अयोग्यता पर विधि आयोग से मांगी रिपोर्ट

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Monday, December 16, 2013-6:36 PM

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने गंभीर अपराधों में अदालत द्वारा सांसदों-विधायकों के खिलाफ अभियोग निर्धारित होने या आरोप पत्र दाखिल होने पर उनकी अयोग्यता की संभावना तलाशने और हलफनामों की सत्यता की पुष्टि का तरीका खोजने के बारे में विधि आयोग से विचार करने का अनुरोध किया है।  

शीर्ष अदालत ने कहा कि चूंकि विधि आयोग चुनाव सुधारों पर गहन अध्ययन के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रहा है, इसलिए वह इन बिन्दुओं पर भी अपनी रिपोर्ट दे सकता है जो फरवरी 2014 तक केन्द्र को दी जा सकती है ताकि 10 मार्च को इस पर विचार किया जा सके। न्यायमूर्ति आर एम लोढा और न्यायमूर्ति शिव कीर्ति सिंह ने विधि आयोग के पास दो मसले विचार के लिये भेजे हैं।

पहला सवाल है कि क्या किसी व्यक्ति को मौजूदा स्थिति के आधार पर सजा मिलने पर अयोग्य घोषित किया जा सकता है या गंभीर अपराध के आरोप में अदालत से अभियोग निर्धारित होने या आरोप पत्र दाखिल होने पर ऐसा किया जा सकता है? दूसरा सवाल है कि क्या झूठा हलफनामा दाखिल करने पर अयोग्यता हो सकती है और यदि हां तो ऐसे हलफनामों की पुष्टि की क्या व्यवस्था हो सकती है?

न्यायालय ने गैर सरकारी संगठन पब्लिक इंटरेस्ट फाउण्डेशन की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान ये दो सवाल विधि आयोग के पास विचार के लिये भेजे। इस याचिका में आपराधिक मामलों में आरोपी व्यक्तियों के चुनाव लडऩे पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया गया है। निर्वाचन आयोग पहले ही न्यायालय में हलफनामा दाखिल करके कह चुका है कि पांच साल या इससे अधिक की सजा वाले आपराधिक मामले में यदि किसी व्यक्ति पर अभियोग निर्धारित हो जाता है तो उसे चुनाव लडऩे के अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए।


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