हैदराबाद, बोध गया, पटना में धमाकों ने जाहिर किए आतंकियों के नापाक इरादे

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Wednesday, December 18, 2013-11:28 AM

नर्इ दिल्ली: वर्ष 2013 में जहां संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरू को दिल्ली की तिहाड़ जेल में फांसी दी गई और अब्दुल करीम टुंडा तथा यासीन भटकल जैसे दुर्दान्त आतंकवादियों को पकडऩे में सफलता मिली वहीं हैदराबाद, बोध गया और पटना में हुए विस्फोटों ने एक बार फिर आतंकवादियों के नापाक इरादे जाहिर किए।

संसद पर 2001 में हुए हमले के दोषी अफजल गुरू को 9 फरवरी को नर्इ दिल्ली की तिहाड़ जेल में फांसी दी गई। फांसी के बाद उसे जेल परिसर में ही दफन कर दिया गया। गुरू दस साल तिहाड में बंद रहा। उसे वर्ष 2002 में फांसी की सजा सुनायी गयी थी। विशेष अदालत के इस फैसले को 2005 में उच्चतम न्यायालय ने सही ठहराया था। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 43 वर्षीय गुरू की दया याचिका 3 फरवरी को ठुकरा दी थी।
 
संसद परिसर में 13 दिसंबर 2001 को पांच आतंकवादियों ने घुस कर अंधाधुंध गोलीबारी की थी, जिसमें नौ लोग मारे गये थे। फरवरी माह में ही हैदराबाद आतंकी हमले से दहल उठा। 21 फरवरी की रात हैदराबाद के बेहद व्यस्त दिलसुखनगर इलाके में हुए आतंकवादी हमले में 13 लोगों की मौत हो गयी और 83 अन्य घायल हो गए।

इलाके में एक के बाद एक दो शक्तिशाली आईईडी विस्फोट हुए। कोणार्क और वेंकटगिरी सिनेमाघरों के नजदीक सड़क किनारे बने ढाबे के बाहर दो साइकिलों में बांधकर रखे गये आईईडी में विस्फोट व्यस्त समय में हुआ और बड़ी संख्या में लोगों के मौजूद होने के कारण अफरातफरी मच गई।


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