तेलंगाना गठन का विरोध, आंध्र विधानसभा स्थगित

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Thursday, December 19, 2013-6:51 PM

हैदराबाद: तेलंगाना राज्य के गठन के लिए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा भेजे गए विधेयक पर बहस के बगैर ही आंध्र विधानमंडल के दोनों सदनों की कार्यवाही गुरुवार को 3 जनवरी तक के लिए स्थगित हो गई। सदन की कार्यवाही अब शीतकालीन सत्र के दूसरे दौर के लिए तीन जनवरी को शुरू होगी। पृथक तेलंगाना राज्य के गठन का विरोध कर रहे सीमांध्र (रायलसीमा और तटीय आंध्र) के विधायकों ने तेलंगाना गठन के विधेयक का विरोध किया।

विधानसभा में तेलुगू देशम और वाईएसआर कांग्रेस के सीमांध्र के विधायकों ने तेलंगाना के गठन के विरोध में लगातार नारेबाजी जारी रखी। इसके कारण विधानसभा अध्यक्ष एन.मनोहर ने सदन की कार्यवाही अगले महीने तक के लिए स्थगित कर दी। विधानसभा का शीतकालीन सत्र 12 दिसंबर को शुरू हुआ था और उसे शुक्रवार तक चलना था, लेकिन अध्यक्ष ने उसे एक दिन पहले ही स्थगित कर दिया। सीमांध्र के तेदेपा विधायक चाहते थे कि विधानसभा अध्यक्ष बिना बहस के ही विधेयक को वापस राष्ट्रपति को भेज दें। जबकि वाईएसआर कांग्रेस के विधायक चाहते थे कि सदन राज्य के विभाजन के विरोध में एक प्रस्ताव पारित करे।

दूसरी ओर तेलंगाना क्षेत्र के सभी दलों के विधायक चाहते थे कि अध्यक्ष विधेयक पर बहस की अनुमति दें। सीमांध्र और तेलंगाना दोनों क्षेत्रों के विधायकों की योजना राष्ट्रपति से मिलने की है। राष्ट्रपति गुरुवार को यहां पहुंचने वाले हैं। विधान परिषद में भी विधेयक पर हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही तीन जनवरी तक के लिए स्थगित कर दी गर्ई।

मुख्यमंत्री एन. किरण कुमार रेड्डी ने कहा कि जहां इतना दुराव है वहां बहस कैसे हो सकती है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष और विधान परिषद के सभापति से आग्रह किया कि यदि जरूरी हो तो वे कार्य मंत्रणा समिति की बैठक बुलाएं। रेड्डी ने कहा कि बहस संविधान के नियमों और परंपराओं के दायरे में ही हो। यह बिना उकसावे के हो और सदस्य उपयोग की गई भाषा के प्रति सजग रहें। किसी की संवेदनाओं को चोट नहीं पहुंचाया जाना चाहिए।


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