चव्हाण के खिलाफ कार्रवाई से इनकार पर अदालत का दरवाजा खटखटाया

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Sunday, December 22, 2013-3:30 PM

मुंबई: एक पूर्व पत्रकार ने बंबई उच्च न्यायालय में एक आवेदन दायर कर आदर्श हाउसिंग सोसाइटी घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी से इनकार के महाराष्ट्र राज्यपाल के आदेश पर सवाल खड़ा किया है। पूर्व पत्रकार केतन तिरोडकर ने अपने आवेदन में उच्चतम न्यायालय के आदेश का जिक्र करते हुए कहा है कि सीबीआई को न्यायपालिका की निगरानी में चलाए जा रहे मामलों में सरकारी सेवकों के अभियोजन के लिए राज्यपाल की मंजूरी की जरूरत नहीं है।

आवेदन में कहा गया है, ‘उच्चतम न्यायालय ने व्यवस्था दी है कि दिल्ली पुलिस संस्थापन अधिनियम के तहत सीबीआई को ऐसे मामलों में सरकारी सेवकों के अभियोजन के लिए मंजूरी की जरूरत नहीं है जिसकी निगरानी न्यायपालिका कर रही है।’ आवेदन में दावा किया गया है कि चव्हाण के खिलाफ अभियोजन की इजाजत पाने के लिए सीबीआई ने जो दस्तावेज जमा किए थे उनका संकलन त्रुटिहीन था और वे चव्हाण की ओर से सोसाइटी को अतिरिक्त एफएसआई की इजाजत देने के ‘त्रुटिपूर्ण’ तरीके को इंगित करता है।’ आवेदन में यह भी दावा किया गया है, ‘बदले में, चव्हाण की सास और उनके ससुर के भाई को सोसाइटी में फ्लैट आबंटित किए गए।’


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