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गांगुली की शिकायत : उनका पक्ष ठीक से नहीं लिया गया

  • गांगुली की शिकायत : उनका पक्ष ठीक से नहीं लिया गया
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Monday, December 23, 2013-5:45 PM

नई दिल्ली:  उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश ए के गांगुली ने किसी इंटर्न का उत्पीडऩ या उसके प्रति कोई अवांछित आचरण करने के प्रयास से इनकार करते हुए आज भारत के प्रधान न्यायाधीश पी सदाशिवम से शिकायत की कि अदालत ने उनके पक्ष पर ठीक ढंग से ध्यान नहीं दिया।  न्यायमूर्ति गांगुली ने प्रधान न्यायाधीश को लिखे आठ पृष्ठों के पत्र में कहा है कि वह इस पत्र की एक प्रति राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को भी भेज रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैं हाल के कुछ घटनाक्रमों को लेकर व्यथित हूं। मैं इस बात को लेकर दुखी हूं कि आपके नेतृत्व में उच्चतम न्यायालय ने मेरा पक्ष ठीक ढंग से नहीं लिया।’’ 

उन्होंने कहा कि एक इंटर्न के आरोपों को लेकर मीडिया में चल रही बातों  पर गहन विचार के बाद वह अपनी चुप्पी तोडऩे पर विवश हुए हैं।  पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष गांगुली ने कहा, ‘‘सबसे पहले मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि मैंने कभी भी किसी महिला इंटर्न का उत्पीडऩ नहीं किया और न ही उसके प्रति कोई अवांछित प्रयास किया। ऐसा आचरण मेरे व्यक्तिगत आचरण से मेल नहीं खाता।’’   उन्होंने पत्र में लिखा है, ‘‘मैंने कई पुरूष और महिला इंटर्नो की काफी मदद की है। वे आज तक मेरा काफी सम्मान करते हैं।’’ गांगुली ने अपने पत्र में कहा, ‘‘मेरी छवि को धूमिल करने के संगठित प्रयास हो रहे हैं क्योंकि दुर्भाग्य से मेरा कार्य ऐसा रहा है, मैंने कुछ फैसले कुछ शक्तिशाली हितों के खिलाफ दिये हैं।’’  

उन्होंने कहा, ‘‘मैं इस पूरे मामले को मेरी छवि धूमिल करने की स्पष्ट साजिश के तौर पर देखता हूं जो किसी निहित उद्देश्य से किया गया है।’’ उन्होंने आरोपों की जांच करने के लिए उच्चतम न्यायालय के तीन न्यायाधीशों की समिति पर सवाल उठाते हुए दलील दी कि चूंकि इंटर्न लड़की उच्चतम न्यायालय की कर्मचारी नहीं थी और वह एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश थे इसलिए समिति ‘‘गठित करने की कोई जरूरत नहीं थी।’’  गांगुली ने कहा, ‘‘न्यायाधीशों की समिति गठन से पहले इंटर्न द्वारा उच्चतम न्यायालय या आप श्रीमान के समक्ष किसी भी रूप में कोई शिकायत नहीं की गई थी और संभवत: लड़की ने अपना बयान समिति के निर्देश पर दर्ज कराया।’’  गांगुली ने कहा कि एक समाचार पत्र में 12 दिसम्बर की एक खबर निश्चित तौर पर अटॉर्नी जनरल द्वारा एक याचिका का आधार नहीं हो सकती जिस पर प्रधान न्यायालय के कार्रवाई करने की जानकारी है। 

  उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए बताया गया कारण स्वीकार नहीं किया जा सकता कि समिति का गठन यह पता लगाने के लिए किया गया कि क्या न्यायाधीश एक सेवारत न्यायाधीश है, क्योंकि ब्लॉग ने स्पष्ट रूप से सेवानिवृत्त न्यायाधीश होने का खुलासा कर दिया था।’’   उन्होंने न्यायालय के अधिकारियों के व्यवहार के बारे में शिकायत करते हुए कहा कि उनके प्रवेश करते ही उन्हें अधिकारियों के एक जमघट ने घेर लिया जो कि संस्थान के लिए अशोभनीय है।   उन्होंने कहा, ‘‘मुझसे हिरासत में एक व्यक्ति जैसा व्यवहार किया गया।’’

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