वर्ष 2013: सीमा मुद्दों ने रखा रक्षा मंत्रालय को व्यस्त

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Wednesday, December 25, 2013-11:46 AM

नई दिल्ली: नियंत्रण रेखा पर अस्थिरता, चीनी सैनिकों द्वारा बार-बार घुसपैठ और पनडुब्बी आईएनएस सिंधुरक्षक के मुंबई में डूब जाने जैसी बड़ी घटनाओं ने वर्ष 2013 में रक्षा मंत्रालय को व्यस्त रखा। काफी देर बाद विमान वाहक आईएनएस विक्रमादित्य को नौसेना में शामिल किया जाना, सेना में कथित सैक्स स्केंडल, जवानों और अफसरों के बीच जारी झगड़े और भारतीय वायुसेना व एचएएल के बीच प्रशिक्षक विमानों को लेकर हुई खींचतान भी सुर्खियों में छाई रही।

उत्तराखंड मेें बाढ़ राहत कार्यों में सेना और वायुसेना के कड़े परिश्रम ने रक्षा मंत्रालय को सराहना दिलवाई और स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत की सफल शुरआत भी इस वर्ष की उपलब्धि बन गई। उम्र के विवाद पर सरकार को उच्चतम न्यायालय में घसीटने वाले पहले चार सितारा जनरल यानी पूर्व सैन्य प्रमुख जनरल वी के सिंह इस साल भी सुर्खियों में बने रहे। ऐसी खबरें आईं कि उन्होंने जम्मू कश्मीर राज्य सरकार को अस्थिर करने के लिए एक खुफिया इकाई का इस्तेमाल किया था। सिंह ने यह कहकर भी विवाद पैदा कर दिया था कि जम्मू कश्मीर के नेताओं को कुछ काम करवाने के लिए पैसा दिया जाता था।


इस साल की शुरूआत पुंछ में पाकिस्तानी सेना सीमा कार्य दल द्वारा भारतीय जवानों के सिर काटने से हुई। पाकिस्तानी सेना के इस दल ने सीमा पार करके एक सैनिक का सिर काट दिया और दूसरे का शव क्षत विक्षत कर दिया। सेना प्रमुख जनरल बिक्रम सिंह ने सख्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस मामले से निपटने के लिए भारत के पास अपनी मर्जी की जगह और समय पर प्रतिक्रिया देने का अधिकार है। सरकार ने भी अस्थाई तौर पर एक कड़ा रख अपनाया। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने खुद कहा कि इस तरह की घटनाओं के चलते ‘पाकिस्तान के साथ काम सामान्य रूप से नहीं हो सकता।’’

सेना और सरकार द्वारा अपनाए गए कड़े रख के बावजूद पाकिस्तानी सैनिक रके नहीं और उन्होंने संघर्ष विराम का उल्लंघन जारी रखा। अगस्त में पाकिस्तानी सैनिकों ने सांबा में मौजूद पांच भारतीय सैनिकों पर हमला बोला, जो कि कथित रूप से एक अस्थायी शरण-स्थल में सो रहे थे। एक अन्य घटना में भी रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी ने सेना द्वारा तैयार की गई जमीनी रिपोर्टों के आधार पर संसद में स्पष्टीकरण जारी करने हुए भारी भूल कर दी। बाद में इस बयान को बदलना पड़ा और घटना के लिए पाकिस्तानी सैनिकों व आतंकी समूहों को दोषी बताया गया। संघर्षविराम के उल्लंघन जारी रहे और दोनों पक्ष सैन्य अभियानों के महानिदेशकों की साल के अंत में होने वाली बैठक के लिए सहमत हो गए।

जम्मू कश्मीर के केरन क्षेत्र में आतंकी कार्रवाई से निपटने के लिए सेना को कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा। इस मामले में सेना द्वारा अभियानों के बारे में किए जा रहे दावे कथित रूप से असल उपलब्धियों से मेल नहीं खाते थे। प्रधानमंत्री सिंह ने भी इस मामले में रक्षा मंत्रालय को अपनी नाराजगी जताई। चीनी सैनिकों ने भारतीय सीमा में घुसपैठ जारी रखी और सेना ने आमना-सामना की स्थिति को दबाने की कोशिश की।

दोनों देशों के सैनिक उस समय से एक माह तक आमना-सामना की स्थिति में रहे, जब चीनी सेना भारत के दौलत बेग ओल्डी क्षेत्र में 19 किलोमीटर तक घुस आई और क्षेत्र पर अपना दावा करने के लिए वहां तंबू गाड़ लिए। चीनी सेना बार-बार भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ करती रही। अक्तूबर में प्रधानमंत्री की बीजिंग यात्रा के दौरान दोनों पक्षों द्वारा सीमा सुरक्षा सहयोग समझौता किए जाने के बाद भी ये घटनाएं रकी नहीं।


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