आदर्श घोटाला: महाराष्ट्र सरकार के फैसले से राहुल ने जताई असहमति

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Saturday, December 28, 2013-10:54 AM

नई दिल्ली: कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने आदर्श घोटाले पर न्यायिक आयोग की रिपोर्ट को खारिज करने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले से असहमति जताई और कहा कि इस पर पुनर्विचार होना चाहिए।  राहुल गांधी ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘व्यक्तिगत रूप से, मैं उस फैसले से सहमत नहीं हूं। महाराष्ट्र सरकार को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए। संवाददाता सम्मेलन में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी मौजूद थे।

राहुल गांधी महाराष्ट्र सरकार द्वारा आदर्श घोटाले की न्यायिक जांच की रिपोर्ट को खारिज किये जाने के मुद्दे पर पूछे गये सवाल का जवाब दे रहे थे। इस घोटाले में कांग्रेस के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों पर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक के बाद यहां कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित इस संवाददाता सम्मेलन में राहुल ने कहा, ‘‘किसी को भी बचाने का कोई सवाल ही नहीं, उन्हें पुनर्विचार करना चाहिए।

संवाददाता सम्मेलन के तुरंत बाद संवाददाताओं ने चव्हाण से उनकी प्रतिक्रिया जाननी चाहिए तो उनका जवाब था कि वह इस मुद्दे पर अपने सहयोगियों से विचार विमर्श करेंगे। महाराष्ट्र सरकार ने पिछले सप्ताह आदर्श घोटाले की जांच के लिए बनी न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट को खारिज कर दिया था जिसे विधानसभा में पेश किया गया था।

उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जे ए पाटिल की अध्यक्षता वाली इस दो सदस्यीय आयोग ने सांविधिक प्रावधानों के खुलेआम उल्लंघन के लिए तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों सहित अनेक राजनीतिकों को दोषारोपित किया था। राहुल गांधी की यह टिप्पणी उस समय आयी जब वे भ्रष्टाचार से लडऩे के कांग्रेस के संकलप की बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि सभी कांग्रेस शासित राज्य अगले साल 28 फरवरी तक उस तरह के लोकायुक्त कानून बनायेंगे जिसका उल्लेख संसद द्वारा पारित लोकपाल एवं लोकयुक्त कानून में हैं ।

आदर्श मुद्दे पर राहुल की नामंजूरी ऐसे समय में आयी है जब उनके निकट सहयोगी और केन्द्रीय मंत्री मिलिन्द देवडा ने कहा है कि इस मामले पर शांत रहने की बजाय जांच होनी चाहिए। इससे पहले राहुल केन्द्र सरकार द्वारा लाये गये उस अध्यादेश को नकार चुके हैं, जो उच्चतम न्यायालय के एक फैसले के खिलाफ लाया गया था । शीर्ष अदालत ने कहा था कि दोषी ठहराये जाने के बाद सांसदों और विधायकों को तत्काल आयोग्य करार दिया जाएगा। राहुल की नाराजगी के बाद सरकार ने अध्यादेश वापस ले लिया था।

राहुल ने कहा कि भ्रष्टाचार को केवल लोकपाल कानून से परास्त नहीं किया जा सकता। एक विधिवत ढांचा बनाने की जरूरत है, जिसके लिए कई कानून बनाने की आवश्यकता होगी। इसी परिपेक्ष्य में उन्होंने इन विधेयकों को पारित होने से रोकने के लिए भाजपा को कोसा। उन्होंने भाजपा और उसके प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी पर परोक्ष प्रहार करते हुए कहा कि इन दिनों हम भ्रष्टाचार से लडाई को लेकर बडी बडी बातें सुनते हैं। हम बार बार भ्रष्टाचार के बारे में सुनते हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है । अब बात करना फैशन बन चुका है।

उन्होंने कहा कि कई विधेयक संसद में लंबित हैं। ‘‘हम एक ढांचा चाहते हैं लेकिन हमें संसद में रोका जाता है। यदि विपक्ष गंभीर हैं तो हमें बात करना बंद कर कार्रवाई करनी चाहिए। हम इस मामले में भ्रष्टाचार से लडाई में अत्यंत गंभीर हैं।’’ राहुल ने कहा कि संसद का एक सत्र होने दीजिए और फिर एक ढांचा बनाया जाए। जब भी हम ढांचे की बात करते हैं तो विपक्ष पूर्णतया चुप्प हो जाती है। ‘‘ऐसा नहीं सुना कि चलिये इन विधेयकों को पारित करते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि भ्रष्टाचार से लडाई के लिए बातें करने की बजाय विधिवत ढांचा तैयार किया जाए तो देश को काफी फायदा होगा। भ्रष्टाचार के खिलाफ लडाई को लेकर कांग्रेस की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए राहुल ने कहा कि संप्रग सरकार ने इस संबंध में कई कानूनों का प्रस्ताव किया है।


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