मतीन अहमद बने तीन दिन के संकटमोचक

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Wednesday, January 01, 2014-12:08 AM

नई दिल्ली(सतेन्द्र त्रिपाठी): पांच बार से विजयी सीलमपुर के कांग्रेसी विधायक मतीन अहमद ने विधानसभा का सत्र शुरु होने से पहले ही छाए संकट को टाल दिया है। किसी भी पार्टी का कोई विधायक प्रोटेम स्पीकर बनने को तैयार नहीं था। भाजपा विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव लडऩे के मूड में है तो जदयू के विधायक शोएब इकबाल स्थायी रूप से यह जिम्मेदारी चाहते थे। आप पार्टी का प्रोटेम स्पीकर बनने से उनकी संख्या कम हो जाती।

संकट की घड़ी में फंसी आप के लिए मतीन अहमद संकटमोचन बन गए। अब तीन दिन तक विधानसभा में सबसे अहम जिम्मेदारी निभाएंगे। प्रोटेम स्पीकर चुने जाने पर मतीन अहमद कहते है कि कांग्रेस आलाकमान के फैसले का वह सम्मान करते है कि उन्हें यह सम्मान दिया।

सूत्रों के मुताबिक प्रोटेम स्पीकर के लिए सबसे पहले वरिष्ठ भाजपा विधायक जगदीश मुखी का नाम सामने आया था। लेकिन उन्होंने प्रोटेम स्पीकर बनने से साफ इंकार कर दिया। बताया जा रहा है कि भाजपा स्थायी रूप से विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव लडऩे के मूड में है। इस कारण भाजपा अपनी संख्या कम नहीं करना चाहती थी।

आप पार्टी की संख्या तो पहले ही कम है। अगर उनकी पार्टी को यह पद मिलता तो विश्वासमत में गड़बड़ होने की स्थिति बन जाती। इस संकट में आप पार्टी के शिक्षा मंत्री मनीष सिसौदिया ने कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक मतीन अहमद से संपर्क किया। लेकिन उन्होंने मनीष से दे टूक कह दिया कि वह कांग्रेस आलाकमान के आदेश पर ही कोई जिम्मेदारी ले सकते है।
 
सूत्रों का कहना है कि मतीन अहमद ने इस मामले की जानकारी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को दे दी। दिल्ली की जनता की नजरों में अपनी इमेज को साफ करने में लगी कांग्रेस ने उन्हें प्रोटेम स्पीकर बनने के लिए हरी झंडी दे दी। तब जाकर आप पार्टी का संकट टला।

अब 1 जनवरी को उपराज्यपाल नजीब जंग सबसे पहले मतीन अहमद को प्रोटेम स्पीकर पद की शपथ दिलाएंगे। इसके बाद वह विधानसभा जाकर स्पीकर की कुर्सी संभालेंगे। वह नवर्निवाचित विधायकों को शपथ दिलाएंगे। इसके बाद विधानसभा स्थगित कर दी जाएगी।

2 जनवरी को उनके सामने ही आप पार्टी विश्वासमत हासिल करने के लिए मैदान में आएगी। प्रोटेम स्पीकर के नाम पर कांग्रेस का एक विधायक कम होने से वजह से कांग्रेस के 7 व आप के 28 मिलाकर 35 की संख्या होगी। ऐसे में सवाल यह भी है कि अगर जदयू विधायक शोएब इकबाल व निर्दलीय रामबीर शौकीन भी भाजपा के साथ हो जाए तो भी उनकी संख्या 34 होगी और आप विश्वासमत में जीत जाएगी।

3 जनवरी को विधानसभा के स्थायी अध्यक्ष का चुनाव होगा। अब देखना यह है कि विधानसभा अध्यक्ष आप पार्टी का बनता है या फिर वह प्रोटेम स्पीकर की तरह यह पद भी कांग्रेस को ऑफर करती है। भाजपा ने विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव लडऩे की पूरी तैयारी कर रखी है। स्थायी विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव खत्म होते ही प्रोटेम स्पीकर की जिम्मेदारी अपने आप खत्म हो जाएगी।


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