सुरक्षा न लेकर क्या समझदारी दिखा रहे हैं केजरीवाल ?

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Wednesday, January 01, 2014-12:16 AM

नई दिल्ली: दिल्ली के नए मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को सुरक्षा लेनी चाहिए कि नहीं, इस पर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। वास्तव में वी.आई.पी. सुरक्षा को पूरे विश्व में तरजीह दी जाती है, वहीं भारत में इसे स्टेटस सिम्बल के तौर पर माना जाता है।

 केजरीवाल बार-बार कह चुके हैं कि उन्हें तथा उनके मंत्रियों को सरकारी बंगले तथा लाल बत्ती वाली गाडिय़ां नहीं चाहिएं। केजरीवाल तथा उनके सहयोगियों को पूर्व में धमकियां मिलती रही हैं। यही नहीं ‘आप’  सदस्य प्रशांत भूषण पर ह२मला भी हो चुका है। परन्तु एक ऐसा देश जहां पर प्रधानमंत्रियों तथा मुख्यमंत्रियों की हत्याएं हो चुकी हों तथा संसद पर आतंकी संगठनों का हमला हो चुका हो, केजरीवाल को सुरक्षा के मामले को लेकर नरमी बरतना कई सवालों को जन्म देता है।

क्यों जरूरी है सुरक्षा:
1. सुरक्षा न लेना समझदारी की बात नहीं क्योंकि इस तरह पुलिस को केजरीवाल की सुरक्षा में सामान्य से कई गुणा अधिक सुरक्षाकर्मी लगाने पड़ रहे हैं।
2. केजरीवाल के रामलीला ग्राऊंड में शपथ ग्रहण समारोह के दौरान 1700 पुलिस कर्मी लगाने पड़े, जबकि यदि उपराज्यपाल के निवास पर यह समारोह होता तो शायद 100 पुलिस कर्मी ही काफी होते।
3. वैसे भी मुख्यमंत्री को एक समय सीमा की हद में रह कर हर जगह पहुंचना होता है। मान लो अगर केजरीवाल की वैगन आर बिना पायलट के कहीं पर ट्रैफिक जाम में फंस जाती है तो समय पर न पहुंचने के कारण कई महत्वपूर्ण मुद्दे छूट सकते हैं।
4. मुख्यमंत्री की कुर्सी के साथ कुछ जोखिम भी बंधे हुए हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी भी संभावित खतरे के चलते जैड प्लस सुरक्षा ले रहे हैं ऐसे में केजरीवाल को भी खतरे की अनदेखी नहीं करनी चाहिए।
5. दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को मिली सुरक्षा में 2 इंस्पैक्टर, 4 ए.एस.आई., 8 हवलदार और 16 सिपाही यानी कि कुल 30 सुरक्षाकर्मी शामिल थे।  इसलिए केजरीवाल को इतने न सही तो इससे आधे या उससे कुछ कम सुरक्षाकर्मी जरूर ले लेने चाहिए।

केजरीवाल क्यों नहीं चाहते सुरक्षा:
1. केजरीवाल आम आदमी की छवि को दर्शा रहे हैं और वह वी.आई.पी. कल्चर को बंद करना चाहते हैं।
2. केजरीवाल का मानना है कि वी.आई.पी. सुरक्षा पर आने वाला खर्च तथा सरकार पर वित्तीय बोझ सुरक्षा न लेकर कुछ कम किया जा सकता है लेकिन वास्तव में वह आम आदमी का खर्च कम करने की बजाय और भी बढ़ा रहे हैं।
3. लाल बत्ती वाली गाड़ी में घूम कर वह लोगों से दूर हो जाएंगे क्योंकि उनकी पार्टी आम लोगों की ही पार्टी है। वह एक ऐसा मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं जो सीधे तौर पर आम लोगों से जुड़ा रहे।
4. केजरीवाल का मानना है कि यदि राजनेता लोगों के हितों वाली पॉलिसियों पर अमल करने लगें तो उन्हें खतरे का कोई डर नहीं रह जाएगा।


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