इंदिरा के नक्शेकदम पर चल रहे हैं केजरीवाल

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Wednesday, January 01, 2014-7:04 PM

नई दिल्ली : दिल्ली  के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने वह कर दिखाया जो शीला दीक्षित तथा भाजपा पिछले 20 सालों में अपने शासनकाल के दौरान नहीं कर पाईं। केजरीवाल ने दिल्ली वासियों को दिखा दिया कि जनता को नि:शुल्क जल तथा पावर टैरिफ में 50 प्रतिशत की कटौती को 2 दिन में हल किया जा सकता है जिसके लिए 20 सालों के अच्छे प्रशासन की जरूरत नहीं।

शपथ ग्रहण से पहले केजरीवाल यह दोहरा रहे थे कि उनके पास कोई जादू की छड़ी नहीं मगर इन दोनों मुश्किलों का हल उन्होंने मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालते ही 2 दिन में कर डाला। 666 लीटर जल प्रत्येक घर में प्रतिदिन नि:शुल्क दे दिया तथा बिजली के बिलों में 50 प्रतिशत की कटौती कर दी।

आश्चर्यजनक बात यह है कि जल सबसिडी बिल सरकार पर 160 करोड़ प्रति वर्ष महंगा पड़ेगा। यहां तक कि 160 करोड़ को मात्र 60 करोड़ प्रति वर्ष कम किया जाएगा क्योंकि बोर्ड के द्वारा वाटर चाॢजस 10 प्रतिशत बढ़ा दिए गए हैं।क्या 20 हजार लीटर नि:शुल्क जल लोगों को उपलब्ध करवाना लोगों की आंखों में धूल झोंकना या फिर केजरीवाल सही रूप में लोगों से किए वायदों को पूरा करने में समर्थ रहे हैं।

हालांकि केजरीवाल ने पूरी तरह से स्पष्ट नहीं किया कि राज्य में 10 प्रतिशत वाटर चाॢजस प्राप्त करने के बाद दिल्ली जल बोर्ड कितना अतिरिक्त राजस्व प्राप्त करेगा। ऐसा पता चला है कि यह प्रतिवर्ष करीब 100 करोड़ रुपए होगा। चाहे आम आदमी पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में यह वायदा किया है कि किसी भी घरेलू उपभोक्ता के लिए वह वाटर चाॢजस बढ़ौतरी के विरुद्ध है मगर इस 10 प्रतिशत बढ़ौतरी के कारण 12 लाख घरों को 100 से 500 रुपए प्रतिमाह अदा करने होंगे जबकि केवल 8 लाख घरों को इसका फायदा पहुंचेगा।

केजरीवाल ने यह वायदा किया कि वह वाटर टैंकर माफिया जो कि इस व्यवसाय के माध्यम से 700 करोड़ प्रतिवर्ष कमा रहा है, पर नकेल कसेंगे। उन्होंने यह भी वायदा किया कि वह पूरी दिल्ली को पाइप से पीने योग्य जल उपलब्ध करवाएंगे मगर यह घोषणा कब हुई, पता नहीं। वास्तव में अरविन्द केजरीवाल ने नया कुछ भी नहीं किया।

उन्होंने वही किया जो इंदिरा गांधी 70 के दशक में भारत की गरीब जनता के लिए कर चुकी हैं। उन्होंने कहा था, ‘‘वे कहते हैं कि इंदिरा हटाओ, मैं कहती हूं कि गरीबी हटाओ।’’ इंदिरा ने गरीबों के लिए स्कीमों को कामयाब करने हेतु सरकारी खजाना खोल दिया और हजारों करोड़ रुपए बांटे।

मुफ्त बिजली और पानी की लहर पर सवार हो 1987 में सत्तासीन हुई शक्तियों ने उत्पात मचाया था। केजरीवाल इंदिरा के नक्शेकदम पर चल रहे हैं। 50 प्रतिशत दिल्ली वासी केजरीवाल के नि:शुल्क जल से फायदा उठाएंगे मगर भाजपा इसकी पालना नहीं कर सकती क्योंकि उसने तो ‘आप’ का घोषणा पत्र नहीं अपनाया था।

अब कांग्रेस इस मुश्किल में है क्योंकि अब पूरे देश में जल/बिजली दरों में कटौती की मांग जोर पकडऩे वाली है। हरियाणा यह कर चुका है, महाराष्ट्र कर सकता है। सोनिया गांधी ने किसानों का कर्ज माफ किया और मनरेगा दिया। केजरीवाल 28 लाख घरों को नहीं 8 लाख को नि:शुल्क जल दे रहे हैं।

आइए एक नजर उपलब्ध आंकड़ों पर डालें:
घरों की कुल गिनती                                                28 लाख
जिन घरों में मीटर लगा                                                        20 लाख
कार्य कर रहे मीटर वाले घर                                                  16 लाख
20 हजार लीटर से ज्यादा उपभोग करने वाले घर                  8 लाख
10 प्रतिशत या अधिक शुल्क अदा करने वाले घर                  12 लाख
नि:शुल्क जल योग्य घर                                                       8 लाख
जिन घरों को 10 प्रतिशत या अधिक शुल्क अदा करना होगा   12 लाख
नि:शुल्क जल हेतु योग्य घर                                                  8 लाख
प्रतिवर्ष सबसिडी की राशि                                                      160 करोड़


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