डिजीटल फासले को कम करना है जरूरी: प्रधानमंत्री

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Saturday, January 04, 2014-2:13 PM

तिरूवनंतपुरम: ई-साक्षरता हासिल करने की दिशा में केरल के अग्रणी प्रयासों की प्रशंसा करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आज कहा कि देश में आम आदमी के जीवन में सुधार लाने के लिए डिजीटल फासलों को कम करना बेहद जरूरी है। पी एन पनिक्कर विकास विज्ञान केंद्र के तहत आने वाले केरल सरकार के पूर्ण ई-साक्षरता कार्यक्रम की शुरआत करते हुए सिंह ने कहा कि यह प्रयास देश भर में किया जा सकता है। सिंह ने कहा, ‘‘हमें ऐसे प्रयास देश भर में करने की जरूरत है। इससे हमें विकेंद्रीकृत शासन प्रणाली, सेवाओं की बेहतर आपूर्ति (विशेषकर शिक्षा), आर्थिक समावेश और ई-वाणिज्य में सूचना और कंप्यूटर तकनीक की पूरी संभावनाओं को समझने में मदद मिलेगी।’’

केरल में सार्वभौमिक साक्षरता और पुस्तकालय आंदोलन में दिवंगत पी.एन. पन्निकर की सेवाओं को याद करते हुए मनमोहन ने कहा कि पूर्व में हुए आंदोलनों की ही तर्ज पर शुरू किए जा रहे ई-साक्षरता कार्यक्रम से केरल के सामाजिक और आर्थिक विकास तथा जनता के राजनीतिक सशक्तीकरण की गति तेज की जा सकेगी।  प्रधानमंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम से सामुदायिक सफलता की कहानियां आसानी से साझा की जा सकेंगी, जिससे सामाजिक पूंजी निर्माण में भी मदद मिलेगी। 

उन्होंने कहा कि वर्ष 1945 में पन्निकर द्वारा शुरू किया गया ‘ग्रंथशाला संगम’ (पुस्तकालय आंदोलन) 45 पुस्तकालयों के साथ शुरू किया गया था। इस आंदोलन के फलस्वरूप 6000 पुस्तकालयों का पूरा नेटवर्क बन गया। यह आंदोलन केरल के विकास मॉडल की एक महत्वपूर्ण आधारशिला है।  उन्होंने कहा, ‘‘बहुत से सामाजिक इतिहासकार केरल के तथाकथित विकास मॉडल की आधारशिला पुस्तकालय आंदोलन को मानते हैं।’’   प्रधानमंत्री ने कहा कि गांधीवादी पन्निकर ने सामाजिक मैत्री और सामंजस्य बढ़ाने के लिए भी कार्य किया। अपने अंतिम वर्ष उन्होंने ‘मैत्री गांव आंदोलन’ को समर्पित कर दिए। 

शुरूआत में मुख्यमंत्री ओमान चांडी ने कहा कि इस कार्यक्रम का लक्ष्य राज्य में 33 माह में ई-साक्षरता हासिल करना है। इस तरह राज्य कुल साक्षरता से पूर्ण साक्षरता की ओर बढ़ेगा।  इस पहले चरण में इस अभियान के अंतर्गत राज्य की 100 पंचायतें आएंगी।  इस अवसर पर केरल के राज्यपाल निखिल कुमार, केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री शशि थरूर, राज्यसभा के उपसभापति पी जे कुरियन, राज्य मंत्री पी के अब्दु रब्ब व शिबु बेबी जॉन और पी एन पन्निकर विज्ञान विकास केंद्र के उपाध्यक्ष एन बालगोपाल भी मौजूद थे।
 


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