सिख विरोधी दंगा: 2,733 की मौत, 3163 गिरफ्तार में से 442 दोषी करार

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Sunday, January 05, 2014-1:05 PM

नई दिल्ली: वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों के संदर्भ में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान के बीच सरकार ने बताया है कि दिल्ली में 1984 के सिख विरोधी दंगों में 2,733 लोग मारे गए थे और इस सिलसिले में गिरफ्तार 3163 लोगों में से केवल 442 को अपराध का दोषी करार दिया जा सका है। सरकार ने हालांकि इस मामले में मृतकों एवं पीड़ितों का ब्यौरा देने से इंकार करते हुए कहा कि गृह मंत्रालय में इस प्रकार का कोर्ई आंकड़ा नहीं रखा जाता। सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत गृह मंत्रालय से 1984 के सिख विरोधी दंगों में शामिल अभियुक्तों का ब्यौरा, मृतकों, घायल और अशक्त हुए लोगों और अब तक इस संबंध में की गई कार्रवाई के बारे में सम्पूर्ण जानकारी मांगी गई थी।

लोकसभा में हालांकि एक प्रश्न के लिखित उत्तर में गृह राज्य मंत्री मुल्लापल्ली रामचंद्रन ने बताया था कि साल 1984 के सिख विरोधी दंगे के सिलसिले में 3163 लोगों को गिरफ्तार किया गया जिसमें से केवल 442 लोगों को इस अपराध का दोषी करार दिया जा सका है। बहरहाल, आरटीआई के तहत 1984 के दंगे में मारे गए लोगों का ब्यौरा मांगे जाने पर गृह मंत्रालय ने कहा कि, ‘‘मांगी गई सूचना का संबंध कानून एवं व्यवस्था तथा लोक व्यवस्था से संबंधित है जो भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची भाग 2 राज्य सूची में वर्णित राज्य का विषय है और गृह मंत्रालय में इस प्रकार का कोई डाटा नहीं रखा जाता है।’’ सिख विरोधी दंगों के संदर्भ में मंत्रालय ने बताया, ‘‘आहूजा समिति की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में 2,733 लोग मारे गए थे।’’ सूचना के अधिकार कानून के तहत दिल्ली स्थित आरटीआई कार्यकर्ता गोपाल प्रसाद ने गृह मंत्रालय से यह जानकारी मांगी थी।

रामचंद्रन ने जानकारी दी थी कि, ‘‘दिल्ली में इस घटना के सिलसिले में 650 मामले दर्ज किये गए जिसमें 3163 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें से 442 लोगों को दोषी करार दिया गया जबकि 2706 लोगों को बरी किया गया है। 15 लोगों के खिलाफ अभी भी सुनवाई जारी है।’’  प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शुक्रवार को कहा था कि 1984 के दंगों से प्रभावित सिखों के लिए संप्रग ने काफी कुछ किया है लेकिन बहुमूल्य जीवन के नुकसान की भरपायी के लिए कोई भी मुआवजा पर्याप्त नहीं है।

सिंह ने कहा था कि वह दंगों के सिलसिले में सिख समुदाय के लोगों से संसद में माफी मांग चुके हैं और उनकी सरकार ने जहां तक संभव हुआ, पीडित परिवारों को राहत दी है। उन्होंने कहा था, ‘‘मेरा मानना है कि हमारी सरकार ने (सिख पीड़ितों के लिए) काफी कुछ किया है । मैंने हमारे देश की सरकार की ओर से संसद में सिख समुदाय से 1984 में जो कुछ हुआ, उसके लिए सार्वजनिक माफी मांगी है । ऐसा कभी फिर नहीं होना चाहिए।’’


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