मुजफ्फरनगर हिंसा: मुस्लिम नेताओं के मामले वापस लेने की तैयारी

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Sunday, January 05, 2014-6:14 PM

लखनऊः उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार मुजफ्फरनगर में दंगों से पहले भड़काऊ  भाषण देने के आरोपी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और कांग्रेस के मुस्लिम नेताओं के मामले वापस लेने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार ने इस बाबत मुजफ्फरनगर जिला प्रशासन को पत्र भेजकर राय मांगी है। ये पत्र 30 दिसंबर को भेजा गया। शासन या जिला प्रशासन की तरफ  से इस मामले पर कोई अधिकारी मुंह खोलने को तैयार नहीं है।

जिन नेताओं के खिलाफ केस वापस लेने की तैयार हो रही है उनमें मुजफ्फरनगर से बसपा के सांसद कादिर राणा, मुजफ्फरनगर के बसपा विधायक नूर सलीम राणा, बसपा विधायक जमील अहमद और कांग्रेसी नेता सईदुज्मा सहित दस मुस्लिम नेता शामिल हैं। विगत 8 सितंबर को मुजफ्फरनगर में भड़की हिंसा से पहले 30 अगस्त को इन अल्पसंख्यक नेताओं ने मुजफ्फरनगर में एक पंचायत की थी। पंचायत में इन नेताओं ने कथित रूप से भड़काऊ भाषण दिए थे, जिसके बाद कोतवाली नगर में इनके खिलाफ भड़काऊ भाषण देने का मामला दर्ज किया गया था।

वहीं, भड़काऊ  भाषण मामले में जिला प्रशासन ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक संगीत सोम और सुरेश राणा पर सुरक्षा कानून (रासुका) लगा दिया था। बाद में उच्च न्यायालय की एडवाइजरी बोर्ड ने हालांकि रासुका हटा दिया था। विधायक सुरेश राणा ने रविवार को अखिलेश सरकार पर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार इसके माध्यम से एक वर्ग विशेष को खुश करने में लगी है।

इस मामले पर पूछे जाने पर कैबिनेट मंत्री एवं समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने रविवार को संवाददाताओं से कहा, हमारी सरकार उन लोगों के केस वापस लेगी जो निर्दोष हैं। हमने चुनावी घोषणापत्र में भी ये वादा किया था। उल्लेखनीय है कि मुजफ्फरनगर और आस-पास भड़की हिंसा में 62 लोगों की मौत हो गई थी और करीब 50,000 लोग बेघर हो गए।

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