कांग्रेस के आप को साथ देने के मायने!

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Tuesday, January 07, 2014-5:22 PM

नई दिल्ली : दिल्ली की केजरीवाल सरकार को सत्ता में स्थापित किए जाने के निहितार्थों को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में जबर्दस्त आकलन का दौर चल रहा है। कोई कह रहा है कि कांग्रेस नरेंद्र मोदी से निपटने के लिए अरविंद केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी की छवि को कैश करने की कोशिश कर रही है। लब्बो लुबाब निकलकर ये भी सामने आ रहा है कि कहीं आप की स्थिति यूज एंड थ्री की तरह तो नहीं कर दी जाएगी।

राजनीति के जानकार हर कसौटी पर आप की सरकार को घिस रहे हैं। कहा जा रहा है कि अगर केजरीवाल सरकार ने अगले दो महीनों में 700 लीटर पानी वाला वायदा पूरा कर दिया तो उनकी छवि और उभरकर सामने आएगी। केजरीवाल की छवि का इस्तेमाल नरेंद्र मोदी को काउंटर करने में किया जा सकेगा। हालांकि  इस तरह की घोषणा को लागू करने से सरकार दिवालिया भी हो सकती है और राज्य की आर्थिक हालात भी गड़बड़ा सकती है लेकिन ये सब मसले बाद के हैं और बाद में आम आदमी पार्टी को ही इन्हें भुगतना भी होगा।

आप को बढ़ावा देने के पीछे कांग्रेस को एक और बड़ा फायदा हो सकता है। आप जितना आगे बढ़ेगी उतना ही गैरकांग्रेसी वोटों को काटेगी। अगर आप नहीं होगी तो ये वोट भाजपा को मिल जाएंगे। अगर शहरी इलाकों में आप ने 30 हजार वोट भी पा लिए तो ये भाजपा के लिए बहुत ही नुकसानदेह साबित होंगे। इस तरह भाजपा को 30 सीटों तक का नुकसान हो सकता है और कांग्रेस को 30-40 सीटों का फायदा।

एक और समीकरण है इसके पीछे। अगर अभी लोकसभा चुनाव घोषित हो जाते हैं आप चुनाव नहीं लड़ती है तो भाजपा 200 से अधिक सीटें जीत सकती है और मोदी को पी.एम. बनने से कोई नहीं रोक सकता। पर अगर उपरोक्त आंकड़ा सही रहा तो बी.जे.पी. 125-135 पर रुक जाएगी और कांग्रेस 160-170 पर आ जाएगी। हालांकि भाजपा दिल्ली में सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद विपक्ष में बैठी है। राष्ट्रीय स्तर पर भी कुछ ऐसी ही तस्वीर उभर सकती है। लोग यहां तक भी कह रहे हैं कि मोदी को बाहर रखने के लिए कांग्रेस केजरीवाल को पी.एम. भी बना सकती है। ठीक दिल्ली की तरह।


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