84 की विधवाओं को 30 साल बाद पेंशन

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Friday, January 10, 2014-2:50 PM

नई दिल्ली (सुनील पाण्डेय): 1984 के सिख दंगे में पीड़ित परिवारों के लिए दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने आज बड़ी राहत दी है। करीब 30 साल बाद पीड़ित विधवाओं को पेंशन देने की शुरूआत की। चाहे इसे मरहम कहें या फिर लोकसभा चुनाव को देखते हुए पीड़ितों को जोडऩे की कवायद। लेकिन, इस शुरूआत से दर्जनों पीड़ितों का चूल्हा आसानी से जलने लगेगा। इस शुरूआत का लॉलीपाप तो दिल्ली कमेटी के चुनावों और दिल्ली विधानसभा चुनावों को देखते हुए शिरोमणि अकाली दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने पिछले साल ही कर दिया था, लेकिन अमलीजामा आज ठीक से पहनाया गया।

यह पेंशन एजेंडा कमेटी के घोषणा-पत्र में भी शामिल था। तभी तो दिल्ली कमेटी ने ज्यादा देरी किए बगैर आज इसका श्रीगणेश भी कर दिया। दिल्ली कमेटी में आयोजित कार्यक्रम में पहले दिन कमेटी के महासचिव एवं विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने 225 विधवाओं को पेंशन दिया। उन्हें अब हर महीने 1 हजार रुपए का चेक पेंशन के रूप में मिलता रहेगा। पीड़ित विधवाओं की कुल कितनी संख्या है, इसका अंदाजा तो नहीं है, लेकिन अब तक दिल्ली कमेटी के पास करीब 700 पेंशन के लिए आवेदन आ चुके हैं। प्रत्येक आवेदन की गहराई से जांच की जा रही है, उसके बाद ही उसे पेंशन की कैटेगिरी में रखा जा रहा है।

बता दें कि दिल्ली सिख गुरुद्वारा कमेटी 1984 के पीड़ितों की हर तरह से मदद कर रही है। नई कमेटी के सत्तारूढ़ होने के साथ ही पीड़ितों के परिवार में लड़कियों की शादी के लिए विशेष शगुन दिया जाता है, जबकि उनके बच्चों को पढ़ाई के लिए किताब-कॉपी, फीस और वर्दी पूरी तरह से फ्री किया गया है। राशन अलग से हर महीने दिया जाता है। यह सब कुछ अभी नई कमेटी के आने के बाद संभव हुआ है। इससे पहले की सत्ताधारी दल ने दंगा पीड़ित परिवारों को सभी सुविधाएं देना बंद कर दिया था। दंगा पीड़ित परिवार दिल्ली के तिलकनगर एवं जैतपुर में रहते हैं।

दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चेयरमैन मंजीत सिंह जी.के. कहते हैं कि पेंशन की शुरूआत करने से पीड़ित विधवाओं को बड़ी राहत मिलेगी। उनके बच्चों के लिए पढ़ाई, स्कूल सहित बाकी खर्चे तो कमेटी देती ही थी, पेंशन पहली बार उनके हाथों में दिया गया है। वह कहते हैं कि प्रत्येक पेंशन अभ्यर्थी के एक-एक रिकार्ड की जांच के बाद ही उन्हें पेंशन दिया जाएगा, ताकि सही लोगों को इसका लाभ मिल सके। उनके मुताबिक 1984 में हुई घटना से जुड़ी एफ.आई.आर. की कॉपी, केंद्र सरकार का मुआवजा के रिकार्ड एवं अन्य दस्तावेजों को ही आधार माना जा रहा है।

बकौल मंजीत सिंह, उनकी शुरू से मंशा थी कि पीड़ितों को उनका हक मिलना ही चाहिए। पीड़ित परिवारों में पढ़े लिखे युवाओं को रोजगार के साधन भी मुहैया करवाए जा रहे हैं, ताकि उन्हें रोजी रोटी के लिए भटकना न पड़े। इसके लिए पिछले दिनों देश के चुनिंदा कंपनियों एवं प्लेसमैंट एजैंसियों का मेला भी लगाया गया था। इसमें कई दर्जन सिख युवाओं को अच्छी-अच्छी मल्टीनैशनल कंपनियों में रोजगार भी मिला है। उधर, पेंशन पाने वाली विधवाओं ने कमेटी प्रबंधन की जमकर तारीफ की। कई महिलाओं ने इसे अच्छा कदम बताया। साथ ही कहा कि राशन की सहायता तो पहले ही मिलती थी, अब पेंशन से उनका गुजारा आसानी से हो जाएगा।   

 


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