अरूण जेटली ने की शिंदे की कड़ी आलोचना

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Saturday, January 11, 2014-4:55 PM

नई दिल्ली: आतंकवाद के आरोपों में जेल में बंद अल्पसंख्यक समुदाय के युवाओं की भूमिका का आकलन करके उचित निर्णय करने संबंधी मुख्यमंत्रियों को लिखे पत्र को ‘‘अवैध और असंवैधानिक’’ बताते हुए भाजपा ने उसे तुरंत वापस लेने की आज मांग की।  राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरूण जेटली ने इस विषय पर शिंदे की कड़ी आलोचना करते हुए कहा, ‘‘अपराधी के जन्म निशान पर ध्यान दिए बिना एक अपराध तो बस अपराध होता है। किसी की धार्मिक आस्था उसके दोषी होने या निर्दोष होने को तय नहीं कर सकती है।’’  इसे राजनीतिक कदम बताते हुए उन्होंने कहा, गृह मंत्री ने घोषणा की है कि वह सभी मुख्यमंत्रियों को पत्र लिख रहे हैं कि अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों पर लगे आतंकवाद के मामलों की वे समीक्षा करें।

उन्होंने कहा, ‘‘वह चाहते हैं कि राज्य सरकारें केवल एक श्रेणी के नागरिकों के मामलों की समीक्षा करें और अन्य के नहीं जिनके विरूद्ध आतंकवाद के आरोप लगे हैं। जेटली ने कहा, ‘‘गृह मंत्री के इस कदम के औचित्य और वैधता से जुड़े कई मौलिक सवाल पैदा होते हैं। ...यह निश्चित रूप से राजनीतिक कदम है। भारत में कई व्यक्तियों पर आतंकवाद के आरोप हैं। ये प्रावधान कुछ कट्टरपंथी इसलामी समूहों से जुड़े लोगों पर लागू हैं। पिछले कुछ सालों में बहुसंख्यक समुदाय के कुछ सदस्यों के खिलाफ भी ऐसे मामले दर्ज हुए। देश के कई क्षेत्रों में माओवादियों पर भी आतंकवाद के मामले दर्ज हुए।’’ भाजपा नेता ने कहा कि ऐन चुनाव के समय आतंकवाद के आरोप में गिरफ्तार लोगों के मामलों को धर्म के आधार पर समीक्षा करने का पत्र लिखा जाना आपराधिक कानूनों पर वोट बैंक की राजनीति को थोपा जाना है। 

पार्टी के प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने इस पत्र को तुरंत वापस लिए जाने की मांग करते हुए कहा, ‘‘गृह मंत्री दहशतगर्दी से जुड़े मामलों में मजहब के आधार पर भेद कर रहे हैं। एक धर्म से जुड़े दहशतगर्द को माफी और दूसरे से जुड़े को फांसी। यह कौन सा न्याय है।’’ 

शिंदे ने कल संवाददाताओं के समक्ष अपने मंत्रालय की मासिक रिपोर्ट पेश करने के दौरान कहा था कि वह सभी मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर यह सुनिश्चित करने को कह चुके हैं कि आतंकवाद के नाम पर अल्पसंख्यक समुदाय का कोई निर्दोष युवा गलती से हिरासत में न लिया जाए।  गृह मंत्री ने इस अवसर पर बताया कि वह एक बार फिर मुख्यमंत्रियों को पत्र लिख रहे हैं जिसमें आतंकवाद रोकथाम कानून (पोटा) की तर्ज पर जांच या सलाहकार समिति के गठन को कहा जाएगा, जो जेल में बंद अल्पसंख्यक समुदाय के युवाओं के मामलों की समीक्षा करेगी। ये समिति राज्य स्तर की होगी।


 


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