हिन्दी में काम का अकाल नहीं: असगर वजाहत

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Saturday, January 11, 2014-9:22 PM

नई दिल्ली : लोकप्रिय लेखक और नाटककार सैयद असगर वजाहत ने आज कहा कि हिन्दी में काम का अकाल नहीं है और नई पीढ़ी पुराने अनुभवी लोगों के साथ मिलकर अच्छा काम कर रही है।राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) के रंग महोत्सव में पहुंचे वजाहत ने कहा कि हिन्दी में हमेशा से अच्छा काम होता रहा है, अभी भी हो रहा है और यह काम ऐसे ही चलते रहना चाहिए।

विभाजन पर आधारित मशहूर नाटक ‘जिस लाहौर नई वेख्या’ के नाटककार का कहना है कि हमारे लेखकों को समाज से नई चुनौतियां मिल रही है। किसी भी चीज के आगे बढऩे की अपनी एक गति होती है और वे पूर्ण सामथ्र्य के साथ काम को आगे बढ़ा रहे हैं।

एनएसडी में महोत्सव के दौरान आयोजित ‘रंगमंच की दुनिया में नई लेखनी विषय’ पर बातचीत के दौरान वजाहत ने यह बातें कहीं। इसमें अन्य लोकप्रिय लेखकों सुरेन्द्र शर्मा, मन्नू भंडारी और प्रताप सहगल ने अपने नए नाटकों का पाठ किया। एनएसडी का 16वां रंगमंच महोत्सव चार जनवरी से शुरू हुआ है और 19 जनवरी तक चलेगा।


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