बेहतर सेवाओं के लिए नौकरशाहों पर दबाव बनाने की जरूरत : अय्यर

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Tuesday, January 14, 2014-10:48 PM

नई दिल्ली: जमीनी स्तर पर योजनाओं को आकार देने के लिए समन्वित प्रयास नहीं किए जाने पर नौकरशाही को आड़े हाथों लेते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने आज कहा कि उच्चतम स्तर पर राजनीतिक इच्छाशक्ति को उन पर दबाव डालना होगा। अय्यर ने कहा, ‘‘ उच्चतम स्तर पर राजनीतिक इच्छाशक्ति को ऐसे लोगों पर दबाव डालने की आवश्यकता है इसके बाद ही हम विकेंद्रीकरण हासिल कर पाएंगे।’’ अय्यर ‘‘स्टेट आफ लोकल गवर्नमेंट्स एंड डिलिवरी आफ पब्लिक गुड्स इन इंडिया’’ विषय पर चर्चा में बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं और निर्धनता दूर करने संबंधी कार्यक्रमों पर केंद्रीय बजट में हर साल कुल व्यय दो लाख करोड़ रूपए है जो केंद्र द्वारा प्रायोजित करीब 150 योजनाओं में विभाजित है। कांग्रेस नेता ने कहा कि यह राशि उपर से नीचे की ओर जाती है और ये सभी कार्यक्रम वंचित लोगों को लक्ष्य कर बनाए गए हैं। आईएएस अधिकारियों को निशाना बनाते हुए उन्होंने कहा कि वे ऐसी योजना के तहत काम करते हैं कि वे एक दूसरे के काम में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। इससे योजनाओं का समन्वयन नहीं हो पाता।

अय्यर ने आरोप लगाया कि अंग्रेजी लिखने में दक्ष नौकरशाह ऐसी भाषा में दिशानिर्देश तैयार करते हैं जो सिर्फ वे ही समझ सकते हैं और इसका मुख्य उद्देश्य साथी अधिकारियों को अधिकार संपन्न बनाना है न कि नागरिकों को। उन्होंने कहा कि सेवाओं की आपूर्ति के लिए राज्य स्तरीय नौकरशाहों द्वारा बड़ी संख्या में गैरसरकारी संगठन नियुक्त किए जाते हैं लेकिन वे लाभार्थियों के प्रति जवाबदेह नहीं होते।

उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि अगर किसी एनजीओ को किसी अवर सचिव ने नियुक्त किया है तो यह सिर्फ उसी नौकरशाह के प्रति जवाबदेह होगा। अय्यर ने कहा कि दिलचस्प है कि एक बार सरकारी कोषागार से पैसा नियुक्त एनजीओ के बैंक खाते में चला गया तो इसका कैग द्वारा अंकेक्षण नहीं किया जा सकता।

अय्यर ने कहा कि किसी भी समय समानांतर निकायों के खातों में 1.35 लाख करोड़ रूपए निष्क्रिय पड़े रहते हैं जहां कैग या राज्यों के स्थानीय लेखा परीक्षक अंकेक्षण नहीं कर सकते। ऐसे निकाय लाभार्थियों के प्रति जवाबदेह नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उनकी राय है कि केंद्र द्वारा प्रायोजित सभी योजनाओं को समाप्त कर दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘ लेकिन मैं समझता हूं कि उन योजनाओं के स्थान पर राज्य योजनाएं होनी चाहिए। आपको हर एक पंचायत के बैंक खातों या कोषागार में सीधे राशि भेजनी चाहिए और कहना चाहिए कि वे अपने हिसाब से उसका उपयोग करें। उसके बाद वे जवाबदेह होंगे।’’    


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