मोदी की चिट्ठी से मुस्लिम समुदाय में हलचल

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Wednesday, January 15, 2014-11:21 PM

नई दिल्ली : गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को एक चिट्ठी लिख एक बार फिर से मुस्लिम समुदाय के लोगों में हलचल मचा दी है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने दंगा मामले में मुस्लिमों का पक्ष लिया है। जो कि देश के हित में नहीं हैं।

मीडिया में आए इस ब्यान के बाद से मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मोदी पर सांप्रदायिक माहौल बिगाडऩे की कोशिश करने का आरोप लगाया है। जामिया इस्लामिक स्टडीज के हेड प्रो. अख्तरुल वासे का कहना है कि कई बार मुस्लिम नौजवानों को आतंकवादी बताकर जेल में डाल दिया जाता है। लेकिन जब सात-आठ साल बाद कोर्ट उन्हें बेकसूर बताकर रिहा करती है, तब तक उनका भविष्य पूरी तरह से खत्म हो चुका होता है।

इस तरह न सिर्फ पीड़ित का परिवार बल्कि कौम के लोगों को भी अलग ही नजरिये से देखा जाता है। उन्होंने कहा कि सुशील कुमार शिंदे ने गृहमंत्री के रूप में यह बेहद सराहनीय बात कही थी कि कहीं दंगा व आतंकवाद के नाम पर बेगुनाहों को तो नहीं पकड़ा जा रहा। शिंदे साहब ने जो चिठ्ठी लिखी उसमें भी यही बात थी कि दंगा मामलों में बेगुनाह अल्पसंख्यक मुस्लिमों को तो पेरशान नहीं किया जा रहा।

 देश का कानून भी यही बात कहता कि बेगुनाहों को न सताया जाए। फिर इस बात पर नरेंद्र मोदी को किस बात की परेशानी है! उन्होंने कहा कि मोदी जी को तो बस मुस्लमानों की हितकारी योजनाओं से चिड़ है। यही वजह है कि वह सरकार द्वारा मुस्लमानों के प्रति उठाए गए कामों की घेराबंदी करते हैं। ताकि देश के मुसलमान आगे न बढ़ सके।

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी की महासचिव एवं वकील इशरत जहां का कहना है कि नरेंद्र मोदी सिर्फ एक विशेष वर्ग की वोट बैंक की राजनीति करते हैं। उनका हमेशा यही काम रहा है। गृहमंत्री शिंदे साहब ने जो चिठ्ठी लिखी उसे नेरंद्र मोदी को सकारात्मक सोच के साथ लेना चाहिए था। लेकिन उन्होंने उल्टा प्रधानमंत्री को चिठ्ठी लिखकर इससे देश के हित में न होने की बात कही। जबकि सच्चाई यह है कि गुजरात में फर्जी मुठभेड़ में मुसलमानों को मारा गया।

मोदी के समय में गुजरात में हुए दंगों में तरह-तरह से मुसलमानों पर जुल्म ठाये गए। देश का कानून भी यही कहता है कि किसी बेगुनाह को न सताया जाए। ऐसे अनेको मामले हैं जिनमें आतंकवाद के नाम पर देश के बेगुनाह मुस्लिम नौजवानों को आतंकवादी बताकर सलाखों के पीछे डाल दिया गया। कोई इसका विरोध करता है तो यह सब नरेंद्र मोदी जी को बुरा लगता है।


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