छत्तीसगढ़ में नक्सलियों से गोली नहीं अब बोली से होगी बात

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Thursday, January 16, 2014-1:55 PM

दंतेवाडा: छत्तीसगढ़ के नक्सली प्रभावित जिले दंतेवाडा में नक्सलियों से गोली नहीं अब बोली से होगी बात। पुलिस की पूरी नजर अब नक्सलियों की आत्म समर्पण नीति और बेहतर बनाने पर होगी। पुलिस अधीक्षक नरेन्द्र खरे ने कल यहां नक्सलियों के आत्म
समर्पण नीति पर चर्चा करते हुए यह बातें कही। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में पुलिस माओवादियों को आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित करेगी। इस हेतु आंध्रप्रदेश की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी आत्म समर्पण नीति को और बेहतर करने पर शासन विचार कर रहा है।

नक्सल प्रवक्ता गुडसा उसेण्डी द्वारा आंध्र पुलिस के सामने हथियार डालने पर पुलिस अधीक्षक ने कहा कि छत्तीसगढ़ के मुकाबले आंध्र में समर्पण नीति बेहतर है। इनाम की राशि वहां अधिक है। छत्तीसगढ में इसकी प्रक्रिया भी जटिल है यह भी एक कारण है। इसके अलावा अब जितने भी नक्सलियों ने आंध्रप्रदेश के सामने हथियार डाले हैं वे इसलिए कि वे मूलत: आंध्रप्रदेश के निवासी है।

उन्होंने कहा कि उनकी रहन सहन संस्कृति अलग है। इसके अलावा एनकांउटर के डर से भी वे छत्तीसगढ़ पुलिस के सामने हथियार डालना नही चाहते है इसलिए नक्सलियों को वापस मुख्यधारा से जोडऩे आत्म समर्पण नीति को बेहतर करने के प्रयास होंगे। इनामी राशि में वृद्धि के साथ प्रक्रिया को और सरल बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि गत वर्ष दुर्दात नक्सल बदरू और नक्सलियों के लिए प्रेरणा बनें उसे जल्द ही पुर्नवास नीति का लाभ मिलेगा और जनता का पुलिस के प्रति विश्वास बढ़े इसके लिए आगामी दिनों में दुरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस एक कार्यक्रम चलाएगी।


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