साधु-संतों को तंग न करे सरकार: श्री श्रीरविशंकर

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Thursday, January 16, 2014-4:26 PM

बेंगलूर: जाने-माने धर्मगुरू श्री श्रीरविशंकर ने केंद्र सरकार पर भारतीय संस्कृति तथा देश की प्रतिष्ठा को नष्ट करने की अंतर्राष्ट्रीय साजिश में शामिल होने का आरोप लगाते हुए उसे आगाह किया है कि वह अपने राजनीतिक लाभ के लिए साधु संतों को झूठे मामले में फंसाकर जेल में डालने की घिनौनी हरकत से तुरंत बाज आए।

बेंगलूर से 35 किलोमीटर दूर अपने आश्रम में श्रीरविशंकर ने भेंटवार्ता के दौरान इस बात पर गम्भीर चिंता व्यक्त की कि केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार खासकर इसकी अगुआ कांग्रेस इस देश की संस्कृति पर चोट करके इसके वैभव को धूल में मिलाने की इस अंतरराष्ट्रीय साजिश को समझ नहीं पा रही है और ऐसी बाहरी ताकतों के हाथों में खेलकर अपने राजनीतिक लाभ के लिए निर्दोष साधु संतों को झूठे मामलों में फंसा कर जेल में बंद कर रही है।

उन्होंने कहा कि इसी साजिश के तहत कांची कामकोटि के वरिष्ठ शंकराचार्य स्वामी जयेन्द्र सरस्वती तथा विजयेन्द्र सरस्वती को गिरफ्तार करके करीब दस साल तथा साध्वी प्रज्ञा को छह साल तक झूठे मामले में जेल में रखा गया। अन्तत: अदालतों ने उन्हें निर्दोष घोषित करके बरी कर दिया है. इससे स्पष्ट होता है कि सरकार साधु संतों के खिलाफ जान बूझकर ऐसी कार्यवाही कर रही है।
 
उन्होंने कहा कि कोई भी संत सामान्यत: आतंकवाद से कोई वास्ता नहीं रखते हैं और शंकराचार्य जैसे अति सम्मानित धर्म गुरूओं की तो आतंकवाद और  में शामिल होने की कल्पना भी नहीं की जा सकती। यह सरकार केवल इन्हीं साधु संतों के पीछे पडी है। उन्होंने स्वीकार किया कि हो सकता है कि कुछ मामलों में धर्मिक क्षेत्र से जुड़े लोग हिंसा या अपराध की घटनाओं में लिप्त होते हों लेकिन इस बात को समझा जाना चाहिए कि ऐसे लोग धर्म की श्रद्धा का दुरू पयोग करते हैं और वे वास्तव में धर्मिक व्यक्ति नहीं होते।

यह पूछे जाने पर कि अंतरराष्ट्रीय साजिश से उनका क्या आशय है।  श्री श्रीरविशंकर ने कहा कि भारत से ईष्र्या करने वाली पश्चिमी ताकतें यह साजिश हमेशा करती रहती हैं। ऐसी ताकतों को लगता है कि भारत को कमजोर तभी किया जा सकता है जब इसकी संस्कृति कमजोर हो जाए। उन्होंने सरकार को आगाह किया कि वह ऐसी बाहरी साजिशों को समझे और अपने तुच्छ राजनितिक लाभ के लिए देश को कमजोर नहीं करें।

उन्होंने कहा कि यूं तो उनका किसी राजनीतिक दल से संबंध नहीं है लेकिन जो पार्टी भारतीय संस्कृति की बात करें. उसके साथ उसकी निकटता होना स्वभाविक है। जब कांग्रेस भारतीय संस्कृति तथा साधु संतों के पीछे पडी है तो वह ऐसी पार्टी का समर्थन कैसे कर सकते हैं। वह ऐसी पार्टी का समर्थन करेगें,जो भारतीय संस्कृति तथा हिन्दू धर्म की बात करती हो। उन्होंने एक प्रश्न के उत्तर में स्वीकार किया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अन्य पार्टियों से बेहतर है1

147 देशों में आर्ट ऑफ लिविंग नामक संस्था के प्रणेता श्री श्रीरविशंकर ने केंद्र सरकार को आडे हाथों लेते हुये कहा कि उसकी गलत नीतियों की वजह से आज किसान आत्महत्या कर रहे हैं। आवश्यकता है 'किसानों को पर्याप्त सब्सिडी दी जाने की' लेकिन सब्सिडी पशुओं का मांस निर्यात करने वाले व्यापारियों को दी जा रही है।  उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चीनी का निर्यात तो मात्र 12 रू पये की दर से कर रही है जबकि देश में चीनी 34 रूपये की कीमत से कम में उपलब्ध नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चीनी एवं चावल का रंग साफ करने के चक्कर में उसमें गंभीर बीमारियां पैदा करने  वाले रसायन मिलाये जा रहे हैं।


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