जुर्म साबित न करने पर लगा जुर्माना

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Saturday, January 18, 2014-10:39 PM

नई दिल्ली : (मनीषा खत्री): दिल्ली उच्च न्यायालय ने गंगाधर नामक व्यक्ति की अपील को खारिज करते हुए कहा कि निचली अदालत ने उसकी अर्जी को खारिज करते हुए उस पर जुर्माना नहीं लगाया,इसलिए उसकी इतनी हिम्मत हो गई कि उसने न्यायालय में अपील दायर कर दी और उसके बाद अपने केस को ठीक से लड़ा भी नहीं।

ऐसे में उस पर बीस हजार रुपए जुर्माना लगाया जाता है। हालांंकि उसने जिसके खिलाफ यह याचिका दायर की थी,उन्होंने अपने केस को ठीक से नहीं लिया। इसलिए जुर्माने की राशि उनको न देकर दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन लायर सोशल सिक्योरटी एंड वेल्फेयर फंड में जमा कराई जाए। 

लगभग 13 साल पहले झूठे मामले में फंसाने का हवाला देकर एक व्यक्ति से पांच लाख रुपए मुआवजा मांगने वाले गंगाधर को मुआवजा तो नहीं मिला,परंतु उसे अब बीस हजार रुपए जुर्माना जरूर भरना पड़ेगा। दिल्ली उच्च न्यायालय ने गंगाधर नामक व्यक्ति की अपील को खारिज करते हुए कहा कि वह किसी भी सूरत में यह साबित नहीं कर पाया कि उसे आपराधिक मामले में झूठा फंसाया गया था।
 
गंगाधर ने पटियाला हाउस के ए.डी.जे के 28 जनवरी 2013 के आदेश को न्यायालय में चुनौती दी थी। उसने गोल्फ लिंक,,दिल्ली में रहने वाले प्रेम सिंह से पांच लाख रुपए मुआवजा मांगा था। उसका कहना था कि वर्ष 1999 में प्रेम सिंह ने उसे अपनी बेटी से छेड़छाड़ करने व धमकी देने के झूठे मामले में उसे फंसाया था। जिस कारण उसे काफी प्रताडि़त किया गया।
 
इस मामले में उसे वर्ष 2009 में बरी कर दिया गया। प्रेम सिंह के कारण उसे दस साल झूठा केस झेलना पड़ा और दिल्ली छोड़कर मुम्बई शिफ्ट होना पड़ा। न्यायमूर्ति आर.एस.एंडलॉ ने गंगाधर की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि वह यह साबित करने में नाकाम रहा है कि वह और प्रेम सिंह की बेटी प्यार करते थे। न्यायालय ने कहा कि गंगाधर प्रेम सिंह के पड़ोस में नौकरों के लिए बने क्वार्टर में रहता था। कभी-कभी वह उन पड़ोसियों के लिए पूजा-पाठ कर देता था।
ऐसे में वह यह नहीं कह सकता है कि वह बतौर नौकर तैनात नहीं था। प्रेम सिंह की बेटी ने अपने बयान में साफ कहा है कि उसका गंगाधर से कोई लेना-देना नहीं था। हालांकि वह यह खुद मान चुका है कि वह प्रेम सिंह की बेटी से प्यार करता था। वह इस बात का कोई सुबूत पेश नहीं कर पाया कि प्रेम सिंह की बेटी ने उसको कोई पत्र लिखा था और वह भी उससे प्यार करती थी। ऐसे में वह यह नहीं कह सकता है कि प्रेम सिंह ने अपनी बेटी को बचाने के लिए उसे झूठे मामले में फंसा दिया। उसे आपराधिक मामले में संदेह का लाभ देकर बरी किया है। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता है कि प्रेम सिंह ने उसे गलत भावना के चलते झूठे मामले में फंसाया था।
 

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