ट्रामा सैंटर का वादा निकला झूठा

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Monday, January 20, 2014-2:53 PM

 नई दिल्ली (राजन शर्मा): बाहरी दिल्ली स्थित संजय गांधी अस्पताल में ट्रामा सैंटर बनाने की महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू होने से पहले ही बंद हो गई है। परियोजना को लेकर कांग्रेस सरकार में लोक निर्माण मंत्री रहे राजकुमार चौहान का दावा झूठा साबित हो रहा है। 

अस्पताल प्रशासन की ओर से दावा किया गया है कि अस्पताल परिसर में कभी भी ट्रामा सैंटर बनाने की कोई परियोजना नहीं बनाई गई थी। ऐसे में, बाहरी व पश्चिमी दिल्ली की 20 लाख आबादी को ट्रामा सैंटर की सुविधा मिलने का सपना अब पूरा होना मुश्किल है। अगर यहां इसको बनाया जाता, तो यह दिल्ली का तीसरा और बाहरी दिल्ली का पहला सैंटर होता। 

मंत्री ने किया था दावा

कांग्रेस सरकार में लोक निर्माण विभाग के मंत्री रहे राजकुमार चौहान ने मंगोलपुरी के संजय गांधी स्मारक अस्पताल में ट्रामा सैंटर बनाने की बात कही थी। उन्होंने मंत्री रहते हुए घोषणा की थी, बाहरी दिल्ली के लोगों को स्वाथ्य सेवा देने के लिए संजय गांधी अस्पताल में ट्रामा सैंटर बनाने की परियोजना बनाई गई है। परियोजना पर काम शुरू कर दिया गया है और लोगों को अब सजंय गांधी अस्पताल में ट्रामा सैंटर की सुविधा दी जाएगी, लेकिन मंत्री का यह दावा केवल चुनावी दावा साबित होकर रह गया है।  

अब अस्पताल प्रशासन की ओर से कहा जा रहा है कि अस्पताल के लिए कभी भी ऐसी कोई परियोजना नहीं बनाई गई थी और परिसर में ट्रामा सैंटर बनाने की जगह भी उपलब्ध नहीं है।

अस्पताल में बढ़ेंगे 200 बेड 

संजय गांधी अस्पताल प्रशासन की ओर से पूर्व मंत्री के उस दावे को खारिज कर दिया गया है। प्रशासन की ओर से दावा किया जा रहा है कि परिसर में ट्रामा सैंटर नहीं, बल्कि 200 बिस्तरों को बढ़ाने की परियोजना तैयार की गई है। इसके लिए भी जगह की कमी के कारण अस्पताल परिसर में पहले से बने पुराने सिंगल स्टोरी भवन को तोड़कर कर नया भवन बनाया जाएगा, जिससे मरीजों को कोई परेशानी न हो और अस्पताल को अपग्रेड करने की प्रक्रिया भी पूरी हो जाए।

20 लाख लोगों को झटका

ट्रामा सैंटर न बनने से बाहरी व पश्चिमी दिल्ली में रहने वाले 20 लाख लोगों की उम्मीदों को करारा झटका लगा है। इस क्षेत्र में अगर ट्रामा सैंटर बना दिया जाता, तो लोगों को लगभग 45 से 50 किलोमीटर का सफर करने के बाद इलाज के लिए नई दिल्ली क्षेत्र का रुख नहीं करना पड़ेगा। क्षेत्र में कई अस्पतालों में बर्न, आईसीयू व आपातकालीन वार्ड तक मौजूद नहीं हैं। 

नहीं बनी थी परियोजना

अस्पताल में ट्रामा सैंटर बनाने की कोई परियोजना नहीं बनाई गई थी। अस्पताल को अपग्रेड करने की परियोजना चल रही है, जिसके अंतर्गत 200 बिस्तरों की संख्या को बढ़ाया जाएगा। 

 

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