बेरोजगारी के मारे पाकिस्तानी हिंदू

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Monday, January 20, 2014-3:31 PM

 नई दिल्ली : पाकिस्तान से बेहतर जिंदगी की तलाश में तकरीबन 3 महीने पहले राजधानी आए शरणार्थियों की समस्याएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। आशियाने की तलाश तो बिजवासन आकर अस्थाई तौर पर फिलहाल खत्म हो गई है, लेकिन रोजगार की समस्या अभी भी मुंह बाए खड़ी है। लोगों को अभी भी खाने-पीने के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। हालांकि, सरकारी मदद से महरूम इन लोगों की सहायता करने के लिए कुछ स्वंयसेवी संस्थाएं जरूर आगे आई हैं।

गौरतलब है कि पाकिस्तान से आए शरणार्थियों में 28 परिवारों में कुल 147 सदस्य हैं, जिनमें नवजात समेत बुजुर्ग, महिलाएं व युवा शामिल हैं। 3 महीने पहले 146 लोगों का जत्था पाकिस्तान से भारत तीर्थ के बहाने से आया था। यहां आने के पश्चात लोगों ने यहीं पर रहने की मांग करते हुए जंतर-मंतर पर डेरा डाला था। 

सरकार से मदद न मिलने के बाद इन लोगों को एक स्वयंसेवी संस्था ने अस्थाई तौर पर बिजवासन में आश्रय दिलाया। यहां पर रहने की समस्या तो दूर हो गई, लेकिन रोजगार की समस्या खत्म नहीं हुई। इन लोगों और स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा सरकार के संबंधित महकमों को इनकी मदद के लिए लिखित में आवेदन दिया जा चुका है। बावजूद इसके इन्हें किसी प्रकार की कोई सहायता नहीं मिल पाई है। हालांकि, संस्थाएं इस ओर अग्रसर हैं।  

 

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