जलाशयों के क्षेत्र में वाणिज्यिक गतिविधियों पर रोक लगे : जल संसाधन मंत्रालय

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Sunday, January 26, 2014-9:16 PM

 नयी दिल्ली : जल संसाधन मंत्रालय ने जलाशयों एवं झीलों के प्राकृतिक प्रवाह में भारी अतिक्रमण तथा अस्थायी बाधा को जिम्मेदार ठहराते हुए एक अधिकार सम्पन्न केंद्रीय समिति ने इन क्षेत्रों में वाणिज्यिक गतिविधियों पर रोक लगाने की सिफारिश की है। 

इसके अलावा उत्तराखंड में बाढ़ के दौरान जानमाल के भारी नुकसान के लिए जलाशयों एवं झीलों के प्राकृतिक प्रवाह में भारी अतिक्रमण तथा अस्थायी बाधा को जिम्मेदार ठहरा  उत्तराखंड सरकार से आदर्श मैदानी बाढ़ क्षेत्र विधेयक को लागू करना सुनिश्चित करने को कहा है।

 समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि नदी के किनारे से 50 मीटर से कम दूरी में स्थित इमारतें राज्य में पिछले वर्ष आयी इस अप्रत्याशित आपदा में काफी हद तक बह गई जिसमें 580 लोग मारे गए और 5400 लोगों का कोई पता नहीं चला। 

समिति ने प्राकृतिक झील के मार्ग में अस्थायी बाधा के कारण क्षेत्र में जल जमाव की संभावना होने का जिक्र किया है। इस बारे में आगे अध्ययन किये जाने की जरूरत पर जोर दिया गया है। 

 समिति ने नदियों में जल के अत्यधिक प्रवाह के लिए कई कारणों की पहचान की है जिसमें ग्लेशियर के पिघलने की दर और नदियों के जल ग्रहण क्षेत्र में भारी बारिश प्रमुख है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ स्थानों पर नदियों के मुख्य मार्ग में पूर्व के बाढ के दौरान नदियों द्वारा मलवा जमा करने से प्रवाह बाधित हुआ। इसके कारण कई स्थानों पर तटबंधों में दरार आ गई और नदियों को मार्ग बदलना पड़ा। 

    

 


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