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अपनों ने मुंह मोड़ा, अब खिलौने ही सहारा

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Wednesday, January 29, 2014-1:36 AM
नई दिल्ली (सज्जन चौधरी): 72 साल की उम्र आराम करने की होती है, लेकिन इस उम्र में एक शख्स रोजाना 60 किलोमीटर का सफर तय कर कनॉट प्लेस खिलौने बेचने आता है। ये किसी मामूली इंसान की नहीं, बल्कि एक ऐसे रिटायर्ड मैनेजर की दास्तान है, जिससे अपनों ने ही मुंह मोड़ लिया।   
 
कनॉट प्लेस में खिलौने बेचते हुए एक बुजुर्ग शख्स को आप देख सकते हैं। इनका नाम है, पीवी सहाय। बहादुरगढ़ रेलवे रोड निवासी सहाय ने सारी उम्र दिल्ली में एक अमेरिकन कंपनी में नौकरी की। बीते दिनों को याद कर वह बताते हैं, अपने दोनों बेटों को पढ़ा-लिखाकर चार्टर्ड अकाउंटेंट बनाया। दोनों बेटों को विदेश भेजा। 1997 में रिटायर होने के बाद जो कुछ पैसा मिला, उसमें से भी दोनों बेटों को बिजनेस के लिए लाखों रुपये दे दिए। 
 
सोचा था बेटों का बिजनेस चल गया तो बुढ़ापे में सहारा मिल जाएगा। लेकिन पीवी सहाय को मालूम नहीं था कि जिंदगी भर की कमाई सौंपकर उन्होंने बुढ़ापे की आखिरी उम्मीद भी खो दी है। पैसे लेकर दोनों बेटों ने मुंह मोड़ लिया। सहाय अपनी आंखों में पानी भरकर कहते हैं कि बच्चे हमें भूल गए, 14 साल से कोई खोज खबर नहीं ली।
 
सहाय के मुताबिक उनकी पत्नी अस्थमा की मरीज हैं, खुद उनके पैरों में भी खराबी है। बहादुरगढ़ अपने घर से मुंडका तक पड़ोसी की वैन में आते हैं और आगे का सफर दिल्ली मेट्रो में तय करते हैं। वह बताते हैं कि दिल्ली मेट्रो के स्टाफ उनके लिए व्हीलचेयर तैयार रखते हैं। कनॉट प्ल
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