कांग्रेस के मुख्यमंत्री परिवर्तन के खेल पर भाजपा की पैनी नजर

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Friday, January 31, 2014-12:04 PM

देहरादून: उत्तराखंड में राजनैतिक अस्थिरता मची हुई है। कांग्रेस में मुख्यमंत्री बनाओ मुख्यमंत्री हटाओ की पहल जारी है। भले ही कई नाम हवा में तैर रहे हो पर चर्चा केवल दो नामो पर ही हो रही है। इस पूरे घटनाक्रम पर भारतीय जनता पार्टी की पैनी नजर है। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 32 और भाजपा को 31 सीटे मिली थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री भुवन चन्द्र खंडूरी के पहल न करने के कारण सत्ता की बाग डोर कांग्रेस के हाथों में आई वह भी पी.डी.एफ तथा बसपा के सहारे। जिनका समर्थन कांग्रेस को सत्ता की चाभी सौंप गया। सत्ता के बाद से ही कांग्रेस ने मुख्यमंत्री को अलग करने की कार्यवाही चल रही है।

इसमें जहां विजय बहुगुणा विरोधी शामिल है वहीं कभी उनके समर्थक रहे वह लोग भी शामिल है जो हरीश रावत के विरोध करने के कारण बहुगुणा के साथ हो लिये। अब यह विरोध अंतिम चरण में है सूत्रों की माने तो विजय बहुगुणा से इस्तीफा लिया जा चुका है उनके उत्तराधिकारी का नाम भी तय किया जा चुका है लेकिन विपक्षीय भाजपा इस पूरे घटना क्रम पर पैनी नजर रखे हुये है। दल के नेताओं का मानना है कि कांग्रेस के अन्तिरम विवाद का भाजपा से कोई लेना देना नही है लेकिन पार्टी इस पूरे मामले पर पैनी नजर रखे हुये है। भाजपा नेताओं का कहना है कि वैसे तो यह कांग्रेस के अंदर खाने की बात है कि वह किसको मुख्यमंत्री बनाये किसको नही लेकिन विकास अवरूद्ध होने  पर हम जनता की बात जरूर उठाना चाहते है।

पिछले एक महिने से अस्थिरता के वातावरण के कारण नौकरशाही पुरी तरह मौज में है और राजनेता भी हाथ पर हाथ धरे नौकरशाही के इस खेल को देख रहे है उनके पास न कुछ कहने को है न कुछ सुनने को। राजनीतिक अस्थिरता के कारण सारा मामला जस का तस है। अपुष्ठ सूत्रों की माने तो विजय बहुगुणा शुक्रवार को राजभवन जाकर इस्तीफा दे सकते है और 1 फरवरी के आस-पास हरीश रावत मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते है लेकिन यह तब तक पुष्ठ रूप नही कहा जा सकता जब तक कोई औपचारिक घोषणा न हो जाये। अभी पिछले दिनों वरिष्ठ भाजपा नेता ने माना था कि पी डीएफ तथा कांग्रेस के कई विधायक उनके सम्पर्क में है वह जब चाहे तब सरकार बना सकते है लेकिन भाजपा नेताओं का कहना है कि वह सरकार गिराने की पहल नही करेंगे। जब सरकार अपनी भार से ही गिर जायेगी तब वह जरूर सरकार बनाने की सोचगें। भाजपा जनता पर एक नया चुनाव नही थोपना चाहती। इसीलिए वह समूचे घटनाक्रम  पर पैनी निगाह रखे हुये है अवसर के अनुकूल समुचित निर्णय लगी।


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