रेल विस्फोट के आरोपी की याचिका पर केंद्र को नोटिस

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Saturday, February 01, 2014-2:39 PM

नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को 2006 मुंबई श्रृंखलाबद्ध रेल विस्फोट के मुख्य आरोपी द्वारा दायर याचिका पर केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस भेजा है। न्यायालय ने आरोपी को होमियोपेथी की पुस्तकें मुफ्त में उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए हैं, क्योंकि वह इन पुस्तकों का खर्च वहन नहीं कर सकता। न्यायमूर्ति मनमोहन ने एहतेशाम कुतुबुद्दीन सिद्दिकी की याचिका पर सरकार को नोटिस जारी किया, जो फिलहाल मुंबई की आर्थर रोड जेल में बंद हैं।

सिद्दिकी ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) याचिका दायर कर दिल्ली स्थित सेंटर काउंसिल फार रिसर्च इन होमियोपेथी (सीसीआरएच) से पुस्तकें लेने की कोशिश थी, लेकिन सेंट्रल इंफोर्मेशन कमिशन (सीआईसी) ने उसके अनुरोध को ठुकरा दिया था। उसने सीसीआरएच द्वारा प्रकाशित 45 पुस्तकों की प्रति उपलब्ध कराने के लिए निर्देश दिए जाने की मंाग की थी।

सिद्दिकी ने इससे पहले दिल्ली के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिख कर मेडिकल की पुस्तकें पढऩे के अपने अधिकार की बात कही थी। इस पर कदम उठाते हुए उच्च न्यायालय ने याचिका को जनहित याचिका में तब्दील कर दिया और वकील सुमित पुष्करना को न्यायालय का सलाहकार नियुक्त किया था। उसने याचिका में लिखा था कि कैदी आम नागरिक नहीं होते और सभी पुस्तकों की प्रति से संबंधित आरटीआई के अंतर्गत इस पर विशेष विचार करने की जरूरत है। उसने पत्र में लिखा था कि उसने आरटीआई कानून के तहत आवेदन दिया था लेकिन सीसीआरएच ने उसके निवेदन को ठुकरा दिया था। उसने कापीराइट कानून के तहत पुस्तकों की सॉफ्ट कॉपी मांगी थी।

बंबई उच्च न्यायालय द्वारा उसके गरीबी रेखा से नीचे होने की पुष्टि की जा चुकी है और सिद्दिकी का कहना है कि इसलिए उसे जानकारी मुफ्त दिया जाना चाहिए। उसने कहा कि एक कैदी को पैसा कमाने की अनुमति नहीं है, इसलिए राज्य सरकार को पुस्तकें उपलबध करानी चाहिए।
 


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