जहां है ‘जय हिंद’ की परंपरा, उनसे ऐसा व्यवहार क्यों

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Sunday, February 02, 2014-2:37 PM

नई दिल्ली (निहाल सिंह) : दिल्ली में रह रहे अरुणाचल प्रदेश के तमाम छात्र कई कारणों से राजधानी में अपने आपको सुरक्षित नहीं मानते। अपने शक्ल-सूरत और कद-काठी की वजह से उन्हें रोजाना नस्लभेदी टिप्पणियों का सामना करना पड़ता है। हालांकि, उनका कहना है कि वह हिन्दुस्तानी हैं और यह उनका देश है। उन्हें हिन्दुस्तानी कहलाने में गर्व महसूस होता है। वहीं भारतीयता का प्रमाण अरुणाचल प्रदेश में साफ दिखाई देता है, जहां लोग एक दूसरे से मिलते वक्त नमस्ते की जगह आज भी बड़े गर्व और जोश से जय हिन्द कहते हैं।

बीते दिनों दिल्ली के लाजपत नगर में हुई इस निर्मम हत्या ने न सिर्फ प्रदेश के निवासियों को बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। नार्थ-ईस्ट के छात्रों के साथ यह कोई पहली घटना नहीं थी कि किसी छात्र के साथ ऐसा हुआ हो? इससे पहले भी दर्जनों बार पूर्वोत्तर की रहने वाली लड़कियां दुष्कर्म का शिकार बनती रही हैं। इस बार छात्र नीडो तानियन की मौत ने पूरी दिल्ली को हिलाकर रख दिया है।

7 बहनों के नाम से महशूर पूर्वोत्तर से हर साल दिल्ली में करीब 75 हजार युवक-युवतियां पढ़ाई के लिए आते हैं जो दिल्ली विश्वविद्यालय, अम्बेदकर विश्वविद्यालय, आई.पी. विश्वविद्यालय आदि जगह में दाखिला लेते हैं, पर चेहरे के अलगाव और रहन-सहन में विविधता होने के कारण इन छात्रों को आशियाने के लिए भारी मशक्त करनी पड़ती है।

वसूलते हैं मनमाना किराया: पूर्वोत्तर के छात्र दिल्ली में पढऩे के लिए आते हैं, तो कुछ खुशनशीब लोगों को विश्वविद्यालय का हॉस्टल मिल पाता है। पर पर्याप्त मात्रा में दिल्ली में हॉस्टल उपलब्ध न होने की वजह से यह छात्र किराए के कमरे की तलाश करते हैं तो वहां भी इन्हें नस्लभेद का शिकार होना  पड़ता है। चेहरे के अलगाव और जागरूकता के अभाव से दिल्ली वाले विदेशी समझ बैठते हैं तो उनसे ज्यादा किराया वसूलने में भी पीछे नहीं हटते।

सामान्यत: पूर्वोत्तर के लोगों के सहित दिल्ली वालो में झगड़े की वजह उनका रहन-सहन और पहनावा बनता है। पूर्वोत्तर के लोग रात में घूमना पसंद और पार्टी करना पसंद करते हैं, जिससे देखने में आया है कि रात में बहुत सारे झगड़े इसकी वजह बने हैं। घूमने के साथ ही इनका खान-पान भी कभी कभार झगड़े की वजह बन जाता है।

खत्म हो भेदभाव
पूर्वोत्तर को अन्य भारत को जोडऩे के लिए जागरूकता ही एकमात्र माध्यम है। यह कहना है सुनील देवधर का। सुनील देवधर माय होम इंडिया नाम से एक स्वयंसेवी संस्था चलाते हैं। देवधर बताते हैं कि पूर्वोत्तर के राज्य और भारत के अन्य राज्यों को जोडऩे के लिए पूर्वोत्तर की जागरूकता बहुत ही अहम माध्यम है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सहित अन्य महानगरों में पूर्वोत्तर के छात्र ज्यादा रहते हैं और ज्यादातर लोग पढ़ाई के लिए ही और राज्यों मे आते हैं, इसीलिए कॉलेज के छात्रों को पढ़ाई के दौरान अन्य राज्यों के लोगों में मिलवाना और उनके बीच का संवाद बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। इसके लिए कालेज में नार्थ ईस्ट छात्रों के लिए एक सैल बनाई  जा सकती है।


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