ऐसे तो दम तोड़ देंगी देसी चिकित्सा पद्धतियां

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Tuesday, February 04, 2014-4:25 PM

नई दिल्ली, 3 फरवरी (सज्जन चौधरी):  देशीय चिकित्सा पद्धति आयुर्वेदिकए पंचकर्माए होम्योपैथिक और यूनानी नगर निगम की उपेक्षा के चलते लाचार हो गई है। नगर निगम ने इस साल खरीदी जाने वाली देशीय दवाईयों के बजट को पिछले साल के मुकाबले आधा कर दिया है। उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने अपने अस्पतालों, डिसपेंसरियों और औषधालयों में देशी दवाईयां उपलब्ध कराने के लिए पिछले साल अप्रैल से सिंतबर माह में 1050 लाख रुपए से दवाईयां खरीदी थी। जबकि इस साल दवाईयों की खरीद के लिए मात्र 520 लाख रुपए का बजटीय प्रावधान किया गया है। इससे साफ  होता है कि निगम की उपेक्षा के चलते ही देशीय चिकित्सा पद्धति कारगर साबित नहीं हो रही है। ऐसा भी नहीं है कि निगम के क्षेत्र में लोगों की संख्या में गिरावट आई हो। निगम के क्षेत्र में तेजी से आबादी बढ़ी है, बावजूद इसके देशीय चिकित्सा पद्धति सरकारी महकमे की उपेक्षा के चलते धरासायी हो रही है। 

नहीं बढ़ाई राशि  

होम्योपैथिक औषधालय के लिए खरीदी गई राशि में कोई इजाफा नहीं हुआ है। पिछले साल की तरह यह राशि 20 लाख रुपए की रखी गई है। जहां तक यूनानी औषधालय की बात है तो निगम ने इसके फंड में भी 70 लाख रुपए की कटौती की है। इस निगम ने इस साल यूनानी के लिए सिर्फ 50 लाख रुपए का ही बजटीय प्रावधान किया है। पिछले साल 120 लाख रुपए के भारी भरकम बजट से दवाईयां खरीदी गई थी। सदन में बजट चर्चा शुरू करते हुए विपक्ष ने स्थायी समिति के पेश किए गए बजट पर यह सवालिया निशान लगाए हैं। विपक्ष के नेता मुकेश गोलय का कहना है कि निगम देशीय चिकित्सा पद्धति को विघटित करने पर तुलीहुई है। 

गवाह हैं रिकार्ड  

निगम का रिकार्ड भी बताता है कि चिकित्सा पद्धति को लेकर इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। निगम ने पिछले साल अप्रैल-सितंबर माह में बल्लीमारान आयुर्वेदिक अस्पताल के लिए खरीदी गई दवाईयों के लिए 150 लाख रुपए खर्च किए थे। इस साल के लिए निगम ने इस राशि को नहीं बढ़ाया है। वहीं हैदरपुर आयुर्वेदिक अस्पताल के लिए पिछले साल 150 लाख रुपए से दवाई खरीद गई थी जबकि इस साल राशि को घटाकर 100 लाख रुपए कर दिया गया है। इसी तरह से पंचकर्मा अस्पताल में पिछले साल 75 लाख रुपए के मुकाबले इस साल दवाईयों की खरीद के लिए 50 लाख रुपए का ही बजटीय प्रावधान किया गया है। आयुर्वेदिक औषधालय के लिए खरीदी जाने वाली दवाईयों की राशि में निगम ने 350 लाख रुपए की कटौती की है। इस साल निगम ने औषधालय के लिए 150 लाख रुपए का ही प्रावधान किया है। जबकि पिछले साल यह राशि 500 लाख थी। 

 

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