...तो जीत का सेहरा होगा राहुल के सिर

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Tuesday, February 04, 2014-4:46 PM

नई दिल्ली: कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी को कांग्रेस ने शुरू से ही युवा चेहरे के रूप में जनता के सामने रखा है और उनमें कहीं न कहीं उनके पिता राजीव गांधी की छवि भी दिखाई देती है जिस कारण अधिकतर लोग चाहते हैं कि राहुल गांधी आगामी प्रधानमंत्री हो लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उठ रही सारी आवाजों पर विराम लगाते हुए सोनिया गांधी ने साफ कर दिया कि राहुल गांधी को कांग्रेस की परंपरा के नाम पर प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित नहीं किया गया।

 

पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने यह कहकर पार्टी नेताओं की राय को खारिज कर दिया कि चुनाव के पहले प्रत्याशी घोषित करना पार्टी की परंपरा में नहीं है। लेकिन राहुल के बारे कुछ ऐसी बाते हैं जो शायद ही किसी मालूम हो। साल 2009 में लड़े गया लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत हुई थी और कांग्रेस ने इस जीत का श्रेय राहुल गांधी को दिया था लेकिन तब राजनीति में कच्चे होने के कारण मनमोहन सिंह सरकार में कोई मंत्री पद नहीं लिया लेकिन धीरे-धीरे राजनीति में सक्रिय होने के बाद राहुल गांधी को कांग्रेस अपाध्यक्ष की कमान सौंपी गईं और साल 2003 में उन्हें सोनिया गांधी के साथ रैलियों और बैठकों में देखा जाने लगा।

 

2007 में राहुल पार्टी के महासचिव बने। हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा इसलिए लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी की भूमिका अहम मानी जा रही है, क्योंकि कांग्रेस मिली हार के बाद हर तरफ से आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। वहीं सूत्रों की माने तो कांग्रेस को अभी भी कमजोर नहीं माना जा सकता क्योंकि 2009 में भी भाजपा की लहर थी लेकिन बाजी कांग्रेस ने ही मारी थी और इसका श्रेय राहुल गांधी को ही दिया गया था इस बार भी अगर कांग्रेस बाजी मार जाती है तो जीत का सेहर राहुल के सिर ही बंधेगा।


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