लोकपाल नियुक्ति मामले में राष्ट्रपति से मिली सुषमा

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Wednesday, February 05, 2014-5:27 PM

नर्इ दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने लोकपाल का चयन करने वाले पैनल में एक न्यायविद की नियुक्ति आम सहमति से न किये जाने पर आज राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से मिलकर इस मामले में अपना विरोध दर्ज कराया। स्वराज का कहना है कि उनकी आपत्ति को दरकिनार कर लोकपाल का चयन करने वाले पैनल में एक न्यायविद् की नियुक्ति आम सहमति के बजाय संख्या बल के आधार पर की गई है। यह उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि  देश में 40 वर्ष के लंबे इंतजार के बाद लोकपाल जैसी महत्वपूर्ण संस्था का गठन हो रहा है। इसलिए इससे जुडे़ सदस्यों की नियुक्ति आम सहमति के आधार पर होनी चाहिए। राज्यसभा में भाजपा के उप नेता रविशंकर प्रसाद ने आज यहां संवाददाताओं को बताया कि प्रावधान के अनुसार प्रधानमंत्री,लोकसभा अध्यक्ष, लोकसभा में विपक्ष की नेता और देश के प्रधान न्यायाधीश के प्रतिनिधि न्यायमूर्ति एच एल दत्तू की सोमवार को पैनल के पांचवें सदस्य की नियुक्ति के लिए बैठक हुई।

 उन्होंने कहा कि बैठक में प्रधानमंत्री ने आम सहमति बनाने का प्रयास नहीं किया और स्वराज की आपत्ति को दरकिनार कर वरिष्ठ वकील पी पी राव को पांचवें सदस्य के रूप में पैनल में शामिल कर लिया गया। स्वराज ने राव को कांग्रेस का करीबी बताते हुए उनके नाम पर असहमति जताई थी।

प्रसाद ने कहा कि वह प्रधानमंत्री से पूछना चाहते हैं कि वह एक ही नाम पर क्यों अडे रहे और स्वराज द्वारा सुझाये गये अन्य नामों पर भी विचार कर किसी एक नाम पर आम सहमति क्यों नहीं बनाई गई। प्रसाद ने कहा कि स्वराज ने  जाने माने न्यायविद् फाली एस नारीमन, हरीश साल्वे और सोली सोराबजी जैसे न्यायविदों के नामों पर भी विचार करने का अनुरोध किया था। इस मुद्दे पर विपक्ष और सरकार के बीच टकराव की वैसी ही स्थिति बन गई है.जैसी मुख्य सतर्कता आयुक्त पी जे थामस की नियुक्ति को लेकर उत्पन्न हुई थी। उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद थामस को पद छोड़ना पडा था।


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