कॉल करने वाले को ही बनाया आरोपी

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Thursday, February 06, 2014-1:11 AM

नई दिल्ली : लाजपत नगर इलाके में नीडो तानिया (18) युवक से मारपीट मामले में अब पुलिस की जांच पर सवाल खड़े हो रहे है। पुलिस पर आरोप लग रहे हैं कि गवाहों को ही पुलिस आरोपी बनाकर हत्यारों को बचा रही है। पुलिस यह इसलिए कर रही है क्योंकि उनपर राजनैतिक दबाव पड़ रहा है। लेकिन पुलिस का कहना है कि सबूत होने के बाद ही गिरफ्तारी हुई है।

निडो तानिया की हत्या के आरोप में सुंदर और उसके भाई पवन को पुलिस ने मंगलवार की रात को गिरफ्तार किया था। दोनों के वकील  शलभ गुप्ता ने साकेत कोर्ट में पुलिस के खिलाफ शिकायत दी। उन्होंने कहा कि सुंदर ने पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी थी। जब पुलिस मौके पर आई थी तो सुंदर और पवन ने फरमान और नीडो के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। लेकिन अगले दिन नीडो की मौत होने के बाद  पुलिस ने आनन फानन में सुंदर और पवन को भी आरोपियों के साथ गिरफ्तार कर लिया।

उनका कहना है कि दोनों भाइयों की दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तारी दिखाकर मामलें को जल्द से जल्द बंद करने की कोशिश की है। दिल्ली पुलिस को इसका जवाब कोर्ट में देना पड़ेगा। लाजपत नगर मर्डर में कानून के जानकारों का कहना है कि अगर पुलिस 29 जनवरी को ही समझौता नहीं करवाकर सख्त कदम उठा लेती तो शायद नीडो आज जिंदा होता। लेकिन पुलिस ने पूरी तरह से मामले में लापरवाही का सबूत दिया है।

दिल्ली पुलिस का यह पहला मामला नहीं है जब बेकसूर उनकी फाइलों में गुनहगार बने हैं। 1999 में मॉडल टॉउन इलाके में एक हत्या के मामले में स्थानीय पुलिस ने सरनाम सिंह और श्रीकिशन नामक गवाहों को ही आरोपी बना दिया था। कोर्ट ने दोनों को बेकसूर कहकर पुलिस की खींचाई की थी।


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