‘मोदी का विरोध कर अपनी छवि चमका रहे हैं नीतीश’

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Thursday, February 06, 2014-8:21 PM

पटना: बिहार में सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड (जदयू) की ओर से राज्यसभा का दोबारा उम्मीदवार नही बनाये जाने से नाराज चल रहे पार्टी के वरिष्ठ नेता और निवर्तमान राज्यसभा सदस्य शिवानंद तिवारी ने आज कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी तथा साम्प्रदायिकता के खिलाफ संघर्ष का बहाना बनाकर सिर्फ अपनी छवि चमकाने में लगे हुए है। तिवारी ने यहां कहा कि उन्होंने अपने दो पत्रों के माध्यम से पार्टी नेतृत्व पर जो सवाल उठाया था उस पर जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने तो मौन साध ही लिया है वही मुख्यमंत्री कुमार ने यह कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया है कि यह उनकी (तिवारी) की पुरानी आदत है। उन्होंने कहा कि जब मुख्यमंत्री किसी सवाल में धिरते है तब बड़े ही मासूमियत से अपनी नियति का हवाला देकर बच निकलते है।

जदयू के नाराज राज्यसभा सदस्य ने सवालिया लहजे मे कहा कि मुख्यमंत्री जैसा ताकतवर व्यक्ति अपनी नियति पर रोना कैसे रो सकता है। उनकी नियति ने उन्हें  विधायक, सांसद, रेल मंत्रालय समेत केन्द्र सरकार में कई विभागों का मंत्री बनाया। उन्होंने कहा कि आज कुमार दस-ग्यारह करोड़ की आबादी वाले बिहार के मुख्यमंत्री है। फिर नियति का रोना रो कर उसे अपमानित क्यों कर रहे है। तिवारी ने कहा कि पिछली घटनाओं को याद करने से ऐसा लगता है कि कुमार गुजरात के मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता नरेंद्र मोदी से लडऩा नही चाहते थे। उन्होंने कहा कि कुमार के लिये राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन(राजग) से अलग होने का सबसे उचित समय वह था जब उन्होंने पटना में मोदी समेत भाजपा के तमाम राष्ट्रीय नेताओं को भोज का न्योता देकर उसे वापस ले लिया था। जदयू के निर्वतान राज्यसभा सदस्य ने कहा कि इससे ज्यादा कोई किसी का और क्या अपमान कर सकता है।

कुमार ने भाजपा नेताओं को भोज का यह न्योता पिछले विधानसभा चुनाव के पहले दी थी। उन्होंने सवाल किया कि इतनी दूर जाकर कुमार पीछे क्यों हट गये। यदि उसी समय राजग से कुमार अलग हो गये होते तो उसके बाद हुए विधानसभा चुनाव में जदयू को अकेले बहुमत मिल गया होता। तिवारी ने कहा कि भाजपा भी आज के मुकाबले बिहार में बहुत छोटी हो गयी होती। उन्होंने कहा कि साहस की कमी या राजग में बने रहने में ही ज्यादा लाभ की उम्मीद में कुमार ने एक एतिहासिक अवसर गवां दिया। उन्होंने कहा कि राजग गठबंधन से बाहर निकलने के लिये उन्होनें भी  कुमार को उस समय सलाह दी थी। गत विधानसभा चुनाव के बाद राजग में रहते हुए भी कुमार की नरेंद्र मोदी के विरोध की नीति जारी रही।



 


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