जनलोकपाल बिल पर केजरीवाल अड़े

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Saturday, February 08, 2014-12:03 AM

नई दिल्ली (अशोक शर्मा): केंद्र सरकार के विरोध के बावजूद दिल्ली की आप सरकार इस बात पर आमादा है कि दिल्ली जनलोकपाल बिल को हर हालत में विधानसभा के विशेष सत्र में पेश कर उसे पारित कराया जाएगा। बेशक विधानसभा में आप की अल्पमत सरकार का साथ दे रही कांग्रेस भी इस बिल को असंवैधानिक बताते हुए इसका विरोध कर रही है। भाजपा ने इस मुद्देे पर अपनी राय पहले से ही स्पष्ट कर रखी है। एक तरीके से टकराव की स्थिति उत्पन्न होती दिख रही है।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का कहना है कि जनलोकपाल के मुद्दे पर सॉलिसिटर जनरल मोहन परासारण ने साफ कहा है कि बिल पर सदन में बहस और पारित किए जाने से पहले उसे केंद्र सरकार से मंजूरी मिलना अनिवार्य है, यदि दिल्ली सरकार ऐसा नहीं करती है, तो वह असंवैधानिक होगा। इस पर   केजरीवाल का कहना है कि जनलोकपाल पर सॉलिसिटर जनरल की राय गलत है। 

याद रहे कि मुख्यमंत्री केजरीवाल तय कार्यक्रम के अनुसार शुक्रवार की प्रात: राजनिवास जाकर उपराज्यपाल नजीब जंग से मुलाकात करने वाले थे लेकिन जनलोकपाल के मुद्दे पर सॉलिसिटर जनरल की राय मीडिया में लीक हो जाने से उन्हें अच्छा नहीं लगा। उसके बाद ही मुख्यमंत्री ने उपराज्यपाल को पत्र लिखकर अपने दिल की बात को उजागर किया है। 

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का तर्क है कि जब दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा के अधिकारी दिल्ली पुलिस के भ्रष्ट कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर सकते हैं, तो वह दिल्ली विकास प्राधिकरण और राजनीतिज्ञों के खिलाफ कदम क्यों नहीं उठा सकते। 

उनका यह भी कहना है कि जब इस बिल से केंद्र सरकार के अधिकारों का हनन या वित्तीय मंजूरी लेने की कोई जरूरत ही नहीं है, तो विधानसभा में पेश करने से पहले केंद्र सरकार से इसकी मंजूरी लेने का कोई औचित्य नहीं है। 


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