समिति ने केंद्र से कहा, राज्यों की रायल्टी की जरूरत को पूरा किया जाए

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Sunday, February 09, 2014-1:33 PM

नई दिल्ली: संसद की एक समिति ने कहा है कि कोयला खनन के जरिये राज्यों को किए जाने वाले रॉयल्टी भुगतान में जल्दी-जल्दी संशोधन किया जाना चाहिए, जिससे दोनों पक्षों के वित्तीय संबंधों को सुधारा जा सके।

कल्याण बनर्जी की अगुवाई वाली कोयला एवं इस्पात पर संसद की स्थायी समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्र और राज्यों के वित्तीय संबंधों में रायल्टी कम दरें व उनमें जल्दी-जल्दी संशोधन नहीं होना, बाधा बने हुए हैं। हालांकि कोयला और लिग्नाइट खनिज राज्यों के हैं, लेकिन रायल्टी की दरें केंद्र सरकार द्वारा तय की जाती हैै। साथ ही इस मुद्दे पर राज्यों की शिकायतों का भी उचित तरीके से निपटारा नहीं किया जाता।

रायल्टी दरों में संशोधन काफी समय से लंबित है। सात प्रमुख उत्पादक राज्यों को दी जाने वाली रायल्टी में एक दशक में मात्र 2.4 गुना का इजाफा हुआ है। 2000-01 में राज्यों को जहां 1,897.78 करोड़ रपये की रायल्टी का भुगतान किया गया था, वहीं 2009-10 में यह आंकड़ा मात्र 4,599.24 करोड़ रपये पर ही पहुंच पाया है। समिति ने मौजूदा रायल्टी प्रणाली को जटिलताओं वाला बताया है।
 


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