गन्ने का भुगतान पिछले साल के मुकाबले रूकेगा डबल

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Wednesday, February 12, 2014-12:08 PM

मुजफ्फरनगर, (राकेश त्यागी): इस बार यू.पी. में गन्ने का भुगतान पिछले साल के मुकाबले डबल रूकने की संभावना बन रही है। किसानों को दो तिहाई भुगतान मिलें चालू वर्ष का नहीं कर पाई है जबकि आधा सीजन बीत चुका है। गत वर्ष अढाई हजार करोड का भुगतान रूक गया था।

 इससे मिलों की आर्थिक स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता हैं। यू.पी. में कुल 117 चीनी मिलों में से अधिकांश निजी क्षेत्र की 99 मिलें हैं, जो आज तक सिर्फ  एक तिहाई भुगतान कर पाई है। गन्ने का सीजन 140 दिन का होता हैं। दिसम्बर में शुरू हुई मिलें 70 दिन बीतने के बावजूद केवल 2 हजार करोड़ का भुगतान दे पाई हैं।

 उनकी तरफ  प्राप्त हुए आंकडों के मुताबिक किसानों के गन्ने का  3968 करोड़ रूपया बकाया खडा हुआ हैं। भुगतान में हो रही देरी की वजह बताई गई कि गन्ने का रेट अधिक जबकि उसका उत्पादन चीनी सस्ते में बिक रही हैं। मिल को 1 कुन्तल गन्ना 280 रूपए में मिलता हैं। इसमें चीनी की रिकवरी पश्चिमी यू.पी. में साढे 8 फीसदी औसत हैं।

 चीनी का एक्स फैक्ट्री रेट (टैक्स व ड्यूटी छोडक़र) 2800 रू प्रति कुन्तल अर्थात 28 रूपए प्रति किलो हैं। इसके हिसाब से 1 कुंन्तल गन्ने से चीनी मिल को 238 रूपए की प्राप्ति होती हैं। इसके अलावा शीरा, खोई तथा मैली बेचकर भी चीनी मिलों को धन की प्राप्ति होती हैं। 1 कुन्तल गन्ने में 5 प्रतिशत शीरा निकलता है, जिसकी कीमत बाजार में 25 रूपए हैं और 4 फीसदी खोई निकलती है, जिसकी कीमत 8 रू बनती हैं, तथा 4 फीसदी मैली निकलती है जो कि 1 रूपए 20 पैसे में बिकती हैं।


1 कुन्तल गन्ने से निकले उत्पादों की कुल कीमत 272 रूपए बैठती हैं। चीनी बनाने में मरम्मत, लेबर तथा तन्ख्वाऐ, कैमिकल, पैकिंग मैटिरियल, बैंको का ब्याज आदि सभी खर्चे जो गन्ने पर 50 रू प्रति कुन्तल आतें हैं। इसे घटा देने पर गन्ने के लिए दी जाने वाली कीमत 222 रूपए प्रति कुन्तल रह जाती हैं, लेकिन घोषित गन्ना मूल्य के मुताबिक 260 रूपए प्रति कुन्तल का भुगतान चीनी मिलों को अभी देना हैं तथा 20 रूपए कुन्तल बाद में देना हैं। इस हिसाब से 58 रूपए प्रति कुन्तल का नुक्सान हैं, जो कि चीनी मिलें देने में असमर्थ हैं। देश का लगभग आधा गन्ना यू.पी. में बोया जाता हैं।

केन्द्र सरकार को चीनी पर नियन्त्रण प्रणाली पुन: लागू कर देनी चहिए। प्रतिमाह के हिसाब से चीनी का कोटा निकालकर चीनी के भाव पर नियन्त्रण बनाने से चीनी और गन्ने की कीमत में बेहतर तालमेल बन पाएगा। देश में यह नियन्त्रण पिछले 50 वर्षो से रहा हैं। इसी के साथ-साथ विदेशी चीनी का आयात बन्द करने के लिए आयात शुल्क को बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर देने से हालात में सुधार हो सकेगा।
 
 

Edited by:Rakesh Tyagi

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