सीएम हरीश रावत की घोषणा पर उलझे पक्ष-विपक्ष

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Wednesday, February 12, 2014-5:02 PM

देहरादून: एक ओर सरकार मुख्यमंत्री हरीश रावत की घोषणा को शत प्रतिशत पूरी करने के लिए तमाम तरह की कोशिशों का हवाला दे रही है,लेकिन चंबा मसूरी फल पट्टी के काश्तकारों की भूमि को नियमित करने के संबधी पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की घोषणा उसके लिए जी का जंजाल बन बन गयी। सदन में भाजपा के विधायक महावीर सिंह रांगड़ ने सवाल उठाया कि पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने टिहरी में फल पट्टी के काश्तकारों की भूमि को सितारगंज की तर्ज पर भूमिधर अधिकार दिये जाने की घोषणा की थी। क्या अब यह घोषणा पूरी हो पायेगी? इस पर राजस्व मंत्री यशपाल आर्य ने कहा कि चंबा मसूरी फल पट्टी की भूमि आरक्षित वन भूमि है जबकि सितारगंज में जो भूमि है वह जेड श्रेणी की है।

उन्होंने कहा कि फल पट्टी की भूमि को इस शर्त पर दिया गया था कि काश्तकार इन पर बाग लगायेंगे,लेकिन उसका उपयोग परिवतर्तित नही होगा। इस पर उन्होंने परीक्षण कराये जाने का आश्वासन दिया,लेकिन विपक्ष ने यह कहकर आपत्ति जतायी कि क्या मुख्यमंत्री की घोषणा का भी परीक्षण कराया जाएगा। इस पर सत्ता पक्ष के विधायक नव प्रभात ने कहा कि 1967 में जब पट्टे आवंटित किये गये थे तो तब उस समय उक्त भूमि पर वन संरक्षण अधिनियम लागू नही था और भूमि का स्वरूप उसी समय परिवर्तित हो गया था। उन्होंने कहा कि वहां पर लोगों द्वारा उसी समय बगीचे लगाये गये हैं और 33 साल हो चुके हैं,लेकिन लोगों को उनका मालिकाना हक नही मिल पा रहा है। पक्ष और विपक्ष द्वारा महज मुख्यमंत्री की घोषणा पर प्रश्न केन्द्रित किये जाने पर राजस्व मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री की घोषणा का संज्ञान लिया जाएगा।


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