पूर्वोत्तर के लोगों की सुरक्षा के लिये न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गई

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Wednesday, February 12, 2014-7:16 PM
नई दिल्ली : राष्ट्रीय राजधानी तथा देश के दूसरे हिस्सों में पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों को नस्ली भेदभाव से संरक्षण प्रदान करने हेतु समुचित व्यवस्था स्थापित करने के लिये उच्चतम न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गयी है।
 
 प्रधान न्यायाधीश पी सदाशिवम की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल  रोहतगी ने इस जनहित याचिका का उल्लेख किया। न्यायालय इस पर शुक्रवार को विचार के लिये सहमत हो गया है। 
 
यह जनहित याचिका सात वकीलों ने दायर की है। इनमे कुछ पूर्वोत्तर राज्यों के रहने वाले हैं। याचिका में हाल ही में पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों पर हुये अनावश्यक हमले और दक्षिण दिल्ली में स्थानीय दुकानदारों की पिटाई से अरूणाचल प्रदेश के युवक नीदो तानिया की मौत का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। 
 
 मुकुल रोहतगल और वकील दीक्षा राय ने कहा कि इन राज्यों के लोगों की सुरक्षा के लिये गृह मंत्रालय ने अभी तक कोई समुचित व्यवस्था नहीं बनायी है। याचिका में केन्द्र सरकार के साथ ही दिल्ली सरकार और सभी राज्य सरकारों तथा केन्द्र शासित प्रदेशों को पक्षकार बनाया गया है। 
 
याचिका में कहा गया है कि देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र के लोग बेहतर अवसरों की तलाश में दूसरे राज्यों में जाते हैं लेकिन वहां उन पर नस्ली फब्तियां कसी जाती हैं और अक्सर उन्हें हिंसा का शिकार होना पड़ता है। 
 
याचिका के अनुसार इन क्षेत्रों के अधिकांश लोगों के पास ऐसे कटु अनुभव हैं जिनमें उनकी शारीरिक संरचना और नाकनक्श के आधार पर उनके साथ पक्षपात किया गया, फब्तियां कसी गयीं, छेड़छाड़ और बलात्कार ही किया गया बल्कि हत्या तक की गयी है।
     
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