दिल्ली हाईकोर्ट ने जारी किए दिशा-निर्देश

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Thursday, February 13, 2014-1:39 AM
नई दिल्ली : दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र, दिल्ली सरकार और पुलिस से प्रवासियों के खिलाफ दुर्भावना से किए जाने वाले अपराधों को रोकने के लिए कानून बनाने के लिए कहा और ऐसे मामलों को तेजी से निपटाने तथा पूर्वोत्तर एवं अन्य राज्यों के लोगों की सुरक्षा के लिए सुरक्षाकर्मियों को तैनात करने जैसे कुछ दिशा-निर्देश जारी किए।
 
मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रामना और न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडला की पीठ ने अरुणाचल के युवक नीडो तानिया की मौत को लेकर खबरों का संज्ञान लिया और कहा कि अदालतों को पूर्वोत्तर के लोगों के उत्पीडऩ के मामलों को तेजी से निपटाना चाहिए।
 
 पीठ ने कहा कि भारत के किसी राज्य के निवासी उत्पीडऩ, हमलों या अन्य किसी आपराधिक कृत्य द्वारा दूसरे राज्य के लोगों को बसने या कोई कारोबार करने से नहीं रोक सकते।
पीठ ने कहा कि उत्पीडऩ रोकने के लिए या उनके खिलाफ दुर्भावनापूर्ण अपराधों में शामिल होने के लिए कानून बनाने की संभावना पर विचार रखने चाहिए, जिनमें नागरिक अधिकार संरक्षण कानून, 1995 और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम, 1989 में संशोधन शामिल हैं। अदालत ने अरुणाचल प्रदेश के एक विधायक के 19 वर्षीय बेटे नीडो की यहां लाजपत नगर में दुकानदारों की पिटाई के बाद मौत की खबरों को संज्ञान में लेते हुए दिशा-निर्देश जारी किए।
 
पीठ ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि हैल्पलाइन नंबर उपलब्ध कराने के लिए कदम उठाए जाएं जो 6 सप्ताह के अंदर प्रभावी हो।  पूर्वोत्तर के लोगों के खिलाफ अपराधों के मामलों में मुकद्दमा चलाने के लिए केवल एक अदालत गठित करने के बजाय संबंधित अदालतों के प्रशासनिक पक्ष पर निर्देश जारी करके तेज फैसले आ सकते हैं। पीठ ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट दाखिल होने में देरी पर भी चिंता जताई। पीठ ने दिल्ली के प्रत्येक जिले में फोरेंसिक प्रयोगशाला बनाने का भी निर्देश दिया।

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