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2 साल से चल रहा था पानी माफिया का राज

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Friday, February 14, 2014-1:52 AM
नई दिल्ली(सतेन्द्र त्रिपाठी): द्वारका में भू-जल चोरी का गोरखधंधा लगभग 2 साल से खुलेआम चल रहा था। डी.डी.ए. की जमीन पर किए बोरवैल की शिकायत पर पुलिस को मौके पर पहुंची थी लेकिन चुपचाप वापस चली गई थी। लोगों ने गोरखधंधे की शिकायत केन्द्रीय जल संसाधन मंत्रालय से लेकर पुलिस आयुक्त तक को की। बावजूद इसके धड़ल्ले से यह धंधा फल-फूल रहा था। इधर इस मामले में एफ.आई.आर. दर्ज कर 8 कर्मचारियों को पकडऩे के बाद पुलिस की निगाहें इस खेल के मास्टरमाइंड पर है। 
 
नवोदय टाइम्स ने बुधवार द्वारका सैक्टर-23 के पोचनपुर गांव के पास डी.डी.ए. की भूमि से भूजल चोरी का पर्दाफाश किया था। इस सिलसिले में दक्षिण-पश्चिम जिला पुलिस की उपायुक्त सुमन गोयल की देखरेख  अतिरिक्त उपायुक्त दिनेश कुमार गुप्ता के नेतृत्व में इस जगह छापा मारा गया। पुलिस टीम ने यहां पर दर्जन से अधिक अवैध बोरबैल, हाईपावर जेनरेटर व छह टैंकर जब्त किए। इस मामले में 8 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया।
 
 इस मामले में द्वारका एस.एच.ओ. सहित 6 पुलिसवालों के खिलाफ जांच के आदेश दिए गए हैं। इस पूरे मामले के सामने आने के बाद पोचनपुर में कार्यरत गैर सरकारी संगठन एक संघर्ष ने पुलिस की मिलीभगत का एक सूबत नवोदय टाइम्स के सामने पेश किया है। संगठन के अध्यक्ष शोभित चौहान ने बताया कि यह चोरी आज से नहीं बल्कि लंबे समय से चल रही थी। उन्होंने विभिन्न विभागों व द्वारका एस.एच.ओ. को 28 नवम्बर 2012 को दिए पत्र की प्रति भी उपलब्ध करवाई। इसकी डी.डी. एन्ट्री 36बी दर्ज है।
 
 इसमें भू-जल चोरी के इस खेल के बारे में पूरा विवरण है। इसमें उन्होंने बताया कि 27 नवम्बर 2012  की शाम पानी चोरी की जगह पर जाकर पी.सी.आर. को फोन भी किया था, इस पर सिपाही कप्तान मौके पर पहुंचा था। उसे पूरा कहानी बताकर एक्शन के लिए कहा लेकिन कुछ नहीं हुआ। 
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