लोकसभा के लिए विधानसभा कुर्बान

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Saturday, February 15, 2014-2:07 AM
नई दिल्ली (सतेन्द्र त्रिपाठी): बड़े फायदे के लिए हमेशा छोटे फायदा को छोडऩा ही पड़ता है। अब लोकसभा चुनाव जीतना है तो विधानसभा तो कुर्बान करनी ही थी। सफलता के नाम पर कुछ नहीं कर पाने वाले असफल मुख्यमंत्री को जनता के सामने जाने के लिए शहीद का दर्जा दिलाना अच्छा नाटक है।
 
दिल्ली की जनता ने जिन्हें नायक बनाया था, वह खलनायक बनकर सामने आ गए। हर दिन सरकार का कोई न कोई नया ड्रामा सामने आ जाता था। अब जनता बेवकूफ नहीं बनेगी। दिल्ली के वकीलों की कुछ ऐसी कटाक्ष भरी राय शुक्रवार को हुए ड्रामे पर उभरकर सामने आई। 
दिल्ली बार काउंसिल के सचिव मुरारी तिवारी का कहना है कि लोकसभा चुनाव को देखते हुए सहानुभूति बटोरने के लिए विधानसभा को कुर्बान किया गया है।
 
अपनी अस्थाई सरकार से इससे अच्छा फायदा नहीं मिल सकता था। आप पार्टी की सरकार बेनकाब हो गई है। 
शाहदरा बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अरुण शर्मा ने कहा कि इस सरकार में तो अराजकता ही फैल गई थी। हर तरफ सरकार के खिलाफ धरने-प्रदर्शन हो रहे थे तो सरकार खुद भी धरना करने में जुटी हुई थी। इस सरकार का हर कदम केवल प्रचार पाने का एक हथकंडा था। नायक बनने चले थे और बन गए खलनायक। 
 
वरिष्ठ अधिवक्ता रमन शर्मा का कहना है कि सरकार को संविधान का पालना करना चाहिए था। आखिर उपराज्यपाल के पास बिल भेजने में दिक्कत क्या थी। सरकार को इस तरह से इस्तीफा देकर जनता की भावना से खिलवाड़ नहीं करना चाहिए था। 
 
हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता डीडी पांडे इस सरकार ने तो कदम अराजकता फैला दी थी। गणतंत्र दिवस के मौके पर जो ड्रामा हुआ, वह पूरे देश ने देखा था। अपने वादे के खिलाफ गाड़ी, सुरक्षा व घर सब कुछ लिया। जो इन 49 दिनों में हुआ वह कभी नहीं होगा। 
 
शाहदरा बार के उपाध्यक्ष महेन्द्र भारद्वाज का कहना है कि अब तो हालत यह हो गई कि लोग आम आदमी कहलाने में शर्म महसूस करेंगे। आम आदमी की सरकार ने इतना गुड़-गोबर कर दिया कि सबकी उम्मीदें धरी रह गई। सरकार बहुत कुछ कर सकती थी, लेकिन कुछ नहीं किया। 

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