अंतरिम बजट में कोई बड़ी घोषणा नहीं, कुछ छोटी रियायतों की उम्मीद

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Sunday, February 16, 2014-5:27 PM

नई दिल्ली: वित्त मंत्री पी. चिदंबरम आगामी लोकसभा चुनाव से पहले कल पेश किये जाने वाले अंतरिम बजट में कुछ रियायतों की घोषणा कर सकते हैं, हालांकि, इस दौरान उन्हें राजकोषीय घाटे को सीमित दायरे में रखने के लिये कड़ी मशक्कत करनी पड़ सकती है। वित्त मंत्री अंतरिम बजट के साथ ही जुलाई 2014 तक के खर्चों की अनुमति के लिये संसद में लेखानुदान भी पेशकश करेंगे।

पारंपरिक तौर पर अंतरिम बजट में प्रत्यक्ष करों में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं होता है और न ही कोई बड़ी नीतिगत घोषणा की जाती है। फिर भी इसमें आम आदमी और मदद की दरकार रखने वाले कुछ क्षेत्रों के लिये रियायतों की घोषणा की जा सकती है। वित्त मंत्री ने इससे पहले संकेत दिया है कि वह अंतरिम बजट में अर्थव्यवस्था को गति देने के लिये उत्पाद और सेवाकर की कुछ दरों में बदलाव कर सकते हैं, लेकिन वह राजनीतिक आमसहमति के अभाव में आर्थिक सुधारों से जुड़े प्रमुख विधेयकों को आगे नहीं बढ़ायेंगे।

उन्होंने कहा ‘‘वर्ष 2004 में तत्कालीन वित्त मंत्री जसवंत सिंह ने अंतरिम बजट पेश करते हुये 12 पृष्ठ का भाषण पढ़ा था। वर्ष 2009 में उस समय वित्त मंत्री रहे प्रणव मुखर्जी ने 18 पृष्ठ का भाषण पढ़ा था। इसलिये मेरे पास चुनने के लिये 12 से 18 के बीच दो संख्या हैं। हम कानून में संशोधन को छोड़कर कोई भी प्रस्ताव रख सकते हैं।’’ यह देखना रोचक होगा कि चिदंबरम सुपर-रिच कर को 2014-15 में भी जारी रखते हैं अथवा नहीं। बहरहाल, संकेत तो यही हैं कि वह ऐसा नहीं करेंगे क्योंकि इसके लिये कानून में संशोधन की आवश्यकता होगी। वित्त मंत्री ने पिछले बजट में सालाना एक करोड़ रपये अथवा इससे अधिक कमाई करने वाले धनी व्यक्तियों पर 10 प्रतिशत आयकर अधिभार लगाया दिया था। देश में ऐसे 42,800 लोग हैं।


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