अलग तेलंगाना की कहानी में जुड़े हैं कई मील के पत्थर

  • अलग तेलंगाना की कहानी में जुड़े हैं कई मील के पत्थर
You Are HereNational
Friday, February 21, 2014-8:50 AM

हैदराबाद: राज्यसभा में कल तेलंगाना बिल को मंजूरी मिलने से वह मांग पूरी होती नजर आ रही है जो करीब 60 वर्ष पहले उठी थी और इसने लंबी यात्रा तय की है जिसमें हिंसक आंदोलन एवं कुछ वर्गों के कड़े प्रतिरोध का सामना शामिल है।
     
अलग तेलंगाना राज्य के गठन के लिए आंध्रप्रदेश पुनर्गठन विधेयक 2014 को मंगलवार को लोकसभा में मंजूरी दी गई और आज इसे उच्च सदन में मंजूरी मिली है जिससे लंबी विधायी प्रक्रिया खत्म हुई और संसद के अंदर-बाहर काफी ड्रामा देखने को मिला। अलग राज्य की मांग इस तर्क पर आधारित है कि तेलंगाना को जल, रोजगार के अवसर और आंध्रप्रदेश में विकास के कोष वितरण में‘न्याय’नहीं हुआ है। आंध्रप्रदेश देश का पहला राज्य है जिसका बंटवारा भाषायी आधार पर हुआ।
    
बहरहाल‘एकीकृत आंध्र’के समर्थक अन्याय की बात से इंकार करते हैं और उनका तर्क है कि आंध्रप्रदेश के गठन के बाद से इस इलाके में हर क्षेत्र में त्वरित विकास हुआ है। दिलचस्प बात यह है कि 1972 में अलग आंध्र राज्य के गठन के लिए आंदोलन हुआ था जिसे तेलंगाना से अलग किया जाए । इस मुहिम का नाम‘जय आंध्र’है ।
     
अलग तेलंगाना राज्य के गठन की कई कहानियां हैं। भाषायी आधार पर आंध्रप्रदेश का गठन पूर्ववर्ती मद्रास राज्य एवं शाही राज्य हैदराबाद के तेलुगु बोलने वाले इलाकों को मिलाकर किया गया। आंध्र के लोग अंग्रेजों के जमाने से ही मद्रास राज्य से आंध्र प्रांत को अलग करने के लिए संघर्ष करते रहे लेकिन सफल नहीं हुए। जब भारत स्वतंत्र हुआ तो उन्हें अपनी उम्मीदें पूरी होती दिखाई दीं। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

बहरहाल गांधीवादी नेता पोट्टी श्रीरामुलु ने अलग राज्य की मांग को लेकर आमरण अनशन किया जिसकी केंद्र ने अनदेखी की । श्रीरामुलु 15 दिसम्बर 1952 को शहीद हो गए जिसके बाद बगावत शुरू हो गई। जवाहरलाल नेहरू की सरकार आंदोलन से हिल गई । प्रधानमंत्री ने 1952 में लोकसभा में घोषणा की कि आंध्र राज्य का गठन होगा। एक अक्तूबर 1953 को आंध्र राज्य अस्तित्व में आया और इसकी राजधानी कुर्नूल बनी ।


विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You