लोकसभा के बाद होगा विधानसभा का फैसला

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Saturday, February 22, 2014-12:59 AM
नई दिल्ली(अशोक शर्मा): केंद्रीय गृह राज्यमंत्री आर.पी.एन. सिंह का कहना है कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली सरकार के इस्तीफे के बाद दिल्ली विधानसभा को इसलिए निलम्बित रखा गया है कि सरकार नहीं चाहती है कि दिल्ली में जल्द चुनाव कर लोगों पर अनावश्यक बोझ डाला जाए? मौजूदा विधानसभा को भंग करने के बजाए विभिन्न विकल्पों की तलाश की जानी चाहिए। इससे स्पष्ट है कि दिल्ली विधानसभा के बारे में अगला कदम अब लोकसभा चुनाव के बाद ही लिया जाएगा। 
 
दूसरी ओर उच्चतम न्यायालय उपराज्यपाल को दिल्ली विधानसभा भंग कर लोकसभा चुनावों के साथ ताजा चुनाव कराने के लिए निर्देश देने की मांग संबंधी आम आदमी पार्टी की याचिका पर सुनवाई के लिए आज सहमत हो गया। प्रधान न्यायाधीश पी. सदाशिवम की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वह 24 फरवरी को याचिका पर सुनवाई करेगी। आप की तरफ से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने कहा दिल्ली में किसी वैकल्पिक सरकार की संभावना नहीं है और उपराज्यपाल को विधानसभा भंग कर देना चाहिए।
 
गृह राज्यमंत्री सिंह ने शुक्रवार को राज्यसभा में बताया कि मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने में अभी 4 साल से ज्यादा का समय है। ऐसे में केंद्र सरकार चाहती है कि अगली सरकार गठित करने के तमाम विकल्पों पर गौर किया जाए। कांग्रेस के कई नेताओं को इस बात का डर है कि जिस तरह से मीडिया में पार्टी का ग्राफ गिरता हुआ बताया जा रहा है, उससे विधानसभा का चुनाव होने की सूरत में भाजपा को लाभ मिल सकता है। 
 
वैसे भी कांग्रेस के नेता भी यही चाहते है कि लोकसभा चुनाव में भाजपा के पी.एम. इन वेटिंग नरेन्द्र मोदी को आगे बढऩे से रोकने के लिए दिल्ली विधानसभा को निलम्बित रखना ही बेहतर साबित होगा। वजह साफ है कि दिल्ली विधानसभा का चुनाव होने पर पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दिल्ली में ही घिरकर रह जाते, अब वह अन्य राज्यों में जाकर जहर उगलकर भाजपा को आगे बढऩे में रोड़ा जरूर अटका सकते हैं। 

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