नस्लभेद मामलों में संवदेनशील बनाई जाए पुलिस: हाईकोर्ट

  • नस्लभेद मामलों में संवदेनशील बनाई जाए पुलिस: हाईकोर्ट
You Are HereNational
Wednesday, March 05, 2014-10:44 PM
नई दिल्ली : नार्थ-ईस्ट के लोगों के प्रति नस्लभेद अपराध को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस आयुक्त को अपने सभी 83 हजार जवानों का संवेदनशील बनाना चाहिए। यह टिप्पणी दिल्ली उच्च न्यायालय ने की है।
 
न्यायालय ने कहा कि पुलिस आयुक्त से कहा कि इस संबंध में वह एक बड़े स्तर पर ड्राइव चलाएं ताकि सभी पुलिसकर्मी इस तरह के मामलों से निपटने में सक्षम हो सकें। न्यायालय ने कहा कि पुलिस को पता है कि नार्थ-ईस्ट से आने वाले लोगों से कैसा व्यवहार किया जाता है। इसे संवैधानिक लोकतंत्र नहीं कहा जा सकता है बल्कि यह नस्लभेद तंत्र है। कोई भी व्यक्ति किसी जगह पर जाति,धर्म या क्षेत्रीयता के आधार पर अपना दावा नहीं कर सकता है। ऐसे में पुलिस को इस मामले में संवदेनशील बनाया जाना जरूरी है। 
 
कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश बी.डी.अहमद व न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल की खंडपीठ ने इस मामले में नए दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा कि पुलिस आयुक्त सभी डी.सी.पी. को निर्देश दें कि वह नार्थ-ईस्ट के लोगों की समस्याओं के बारे में अपने पुलिसकर्मियों को अवगत कराएं।
 
वहीं पुलिस ने अदालत को बताया कि इस दिशा में काम शुरू हो चुका है। जिस पर अदालत ने कहा कि हम चाहते हैं कि सभी पुलिसकर्मियों को इस मामले में संवेदनशील बनाया जाए और उनको बताया जाए कि इस तरह की नस्लभेद टिप्पणी करने वाले किसी आरोपी को न बख्शा जाए।
 
खंडपीठ ने पुलिस से कहा है कि वह इस मामले में 26 मार्च तक स्टे्टस रिपोर्ट दायर करें। इस रिपोर्ट में बताया जाए कि नार्थ-ईस्ट के लोगों के लिए शुरू की गई हेल्प लाइन 1093 पर आई 47 शिकायतों पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है।
 
खंडपीठ ने इस मामले में अरूणाचल प्रदेश के छात्र निडो तानिया की लाजपत नगर में कुछ दुकानदारों द्वारा पिटाई करने के मामले में स्वत संज्ञान लिया था। घटना के एक दिन बाद इस छात्र की मौत हो गई थी। पूर्व में अदालत ने इस मामले में कई दिशा-निर्देश जारी किए थे।
यहाँ आप निःशुल्क रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं, भारत मॅट्रिमोनी के लिए!

Recommended For You